कल 11 अक्टूबर से शुरू शारदीय नवरात्र में रात को भी होंगे मां पूर्णागिरी देवी के दर्शन
मेले की सभी व्यवस्थाएं पूरी
देवभूमि टुडे
चंपावत/टनकपुर। कल 11 अक्टूबर से शुरू शारदीय नवरात्र के लिए मां पूर्णागिरी देवी मंदिर सज गया है। नवरात्र में आज रात से देवी दर्शन चौबीसों घंटे होंगे। पूर्णागिरि मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित किशन तिवारी ने बताया कि नवरात्र के लिए सभी तैयारी पूरी कर ली गई है। समिति के स्वयंसेवक भी इस काम में हाथ बंटा रहे है। प्रशासन के सहयोग से बिजली, पानी, पार्किंग, स्वास्थ्य सहित तमाम व्यवस्था सुचारू कर ली गई है। पूर्णागिरि मेले में स्थानीय टैक्सी स्वामियों और श्रद्धालुओं को प्रशसन ने राहत दी है। पार्किंग ठेकेदार और टैक्सी यूनियन के बीच आपसी सहमति से स्थानीय टैक्सी स्वामियों के वाहनों पर पार्किंग शुल्क में 50 रुपये की छूट देने का फैसला लिया गया है।
नेपाल सीमा से लगे पहाड़ी जिले चंपावत के मैदानी हिस्से टनकपुर से 22 किलोमीटर दूर पूर्णागिरी देवी का दरबार आस्था का धाम है। साढ़े पांच हजार फीट ऊंची पहाड़ी पुण्यागिरि (पवित्र पहाड़ी) पर स्थित मां पूर्णागिरि शक्तिपीठ को देवी सती की नाभि स्थली के रूप में भी माना जाता है। देवी धाम में नवरात्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। देवी मां अपने भक्तों की मनोकामना को फलीभूत करती है।


ये है मान्यता:
शिव महापुराण के अनुसार कनखल में मां पार्वती के पिता राजा दक्ष प्रजापति ने महायज्ञ में अपनी पुत्री पार्वती के पति भगवान शंकर को न्यौता नहीं दिया। पति के इस अपमान से क्रोधित पार्वती यज्ञ स्थल पहुंचीं और अपमान का प्रतिकार करते हुए यज्ञ के हवन कुंड में कूद कर सती हो गई। रौद्र रूप में आए भगवान शंकर अपनी पत्नी पार्वती के शव को लेकर ब्रह्मांड में विचरण करने लगे। शंकर के इस रूप को देख देवी-देवताओं में भय फैल गया। तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से देवी सती के शरीर के 51 टुकड़े कर दिए। मान्यता है कि पुण्य शिखर पर देवी सती की नाभि गिरी थी, इस कारण मां पूर्णागिरि शक्तिपीठ को देवी सती की नाभि स्थली के रूप में भी माना जाता है।
इस तरह पहुंचेंगे पूर्णागिरि धाम:
मैदानी क्षेत्रों के ज्यादातर भक्त टनकपुर तक पहुंचने के लिए रेल मार्ग का उपयोग करते हैं। टनकपुर से 19 किलोमीटर दूर सड़क मार्ग से भैरो मंदिर तक पहुंचते हैं। यहां से तीन किलोमीटर की पैदल दूरी को पार कर पहाड़ी के शिखर पर स्थित देव मां के दर्शन करते हैं।
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