Thursday Oct 29, 2026

कुमाऊं के चारों पर्वतीय जिलों का पहला निजी विश्वविद्यालय है मां पूर्णागिरि विश्वविद्यालय

दूरदराज और संसाधनों की कमी से जूझ रहे छात्र-छात्राओं को मिलेगा लाभ

विश्वविद्यालय स्थापित करने के प्रस्ताव को विधानसभा में मिली मंजूरी

बस अब राज्यपाल के हस्ताक्षर का इंतजार

देवभूमि टुडे

चंपावत/देहरादून। चंपावत का मां पूर्णागिरी कॉलेज ऑफ एजुकेशन जल्द ही अब मां पूर्णागिरी विश्वविद्यालय हो गया है। उत्तराखंड विधानसभा ने 27 अक्टूबर को मां पूर्णागिरी विश्वविद्यालय सहित कुल 3 (2 अन्य विश्वविद्यालय आरोग्यम विश्वविद्यालय हरिद्वार व बीएसएम विश्वविद्यालय हरिद्वार) विश्वविद्यालय स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से संबंधित यह विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के बाद काूनन बन जाएगा।

मां पूर्णागिरी कॉलेज ऑफ एजुकेशन की स्थापना 2012 में चंपावत के खर्ककार्की में बाराकोट क्षेत्र के निवासी नामी शिक्षाविद डॉ. केएस अधिकारी ने की थी। 1 साल पूर्व इसे टनकपुर-पिथौरगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग के नजदीक जूप क्षेत्र में शिफ्ट किया गया। विधानसभा में विश्वविद्यालय स्थापित करने का विधेयक पारित होने के बाद राज्यपाल की स्वीकृति के बाद अब यह कॉलेज, विश्वविद्यालय बन जाएगा। चंपावत ही नहीं, कुमाऊं के चारों पर्वतीय जिलों में स्थापित इस पहले विश्वविद्यालय का लाभ शैक्षणिक रूप से कटे इस जिले के साथ दूरदराज और संसाधनों की कमी से जूझ रहे छात्र-छात्राओं को मिलेगा।

अगले साल से शुरू होगा विधि पाठ्यकम:

मां पूर्णागिरी विश्वविद्यालय में 2027-28 की शिक्षा सत्र से विधि स्नातक की पढ़ाई भी शुरू हो जाएगी। जबकि इसी सत्र से होटल मैनेजमेंट के अलावा BBA, BCA, BA, B.Com एवं BSc भी संचालित होगा। वैसे विश्वविद्यालय बनने से पूर्व मां पूर्णागिरी कॉलेज में B.Ed, B.Sc नर्सिंग, GNM एवं योग विज्ञान का पाठ्यक्रम चल रहा है। इन तमाम पाठक दमोह में करीब 250 छात्र-छात्राएं अध्यनरत हैं।

चंपावत का मां पूर्णागिरी कॉलेज अब बना विश्वविद्यालय।

डॉ. केएस अधिकारी।

'शिक्षा, शोध व रोजगारपरक विषयों का होगा विस्तार'

डॉ. केएस अधिकारी बताते हैं कि मां पूर्णागिरी विश्वविद्यालय बनने के बाद नई फैकल्टी, नए विषयों का शिक्षण कार्य शुरू होगा। गुणवत्तायुक्त शिक्षा के अलावा रोजगारपरक विषयों का शिक्षण एवं शोध कार्य को भी कराया जाएगा। विश्वविद्यालय को रोजगारपरक एवं कौशल आधारित शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा। छात्र-छात्राओं को शिक्षा के साथ व्यावहारिक ज्ञान, कौशल विकास और रोजगार के बेहतर अवसरों से जोड़ा जाएगा। साथ ही भविष्य में विश्वविद्यालय स्थानीय जरूरतों के अनुरूप शिक्षा, नवाचार, उद्यमिता और क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करने में भी उपयोगी भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार जताते हुए डॉ. अधिकारी ने कहा कि मां पूर्णागिरी विश्वविद्यालय आदर्श चंपावत के विजन के अनुरूप सीमांत क्षेत्र में शिक्षा के विस्तार और विकास की नई संभावनाओं की दिशा में काम करेगा।

विश्वविद्यालय बनने से होगा ये बदलाव:

मां पूर्णागिरी कॉलेज के  विश्वविद्यालय बनने का शिक्षा, स्वरोजगार, इनोवेशन और शोध के क्षेत्र में दूरगामी असर होगा।

स्वतंत्रता एवं स्वायत्तता:अब तक कुमाऊं विश्वविद्यालय से संबद्ध रहा यह कॉलेज निजी विश्वविद्यालय बनने से पूरी तरह से स्वतंत्र और स्वायत्त इकाई हो गई है।

खुद डिजाइन कर सकेंगे पाठ्यक्रम:अपना पाठ्यक्रम खुद डिजाइन करने और परिस्थितियों के अनुसार बदलाव करने की पूरी आजादी होती है।

छात्रों को डिग्री देने का अधिकार:निजी विश्वविद्यालय खुद अपनी परीक्षाएं आयोजित करता है और अपने ही नाम से सीधे छात्रों को डिग्री प्रदान करेगा।

शोध और उच्च अध्ययन:स्नातक, स्नातकोत्तर के साथ-साथ पीएचडी और अन्य बड़े शोध कार्यक्रम सीधे अपने विभागों के माध्यम से चलाए जा सकेंगे।

कानूनी व प्रशासनिक ढांचा:UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग)) के दिशा-निर्देशों के तहत और राज्य सरकार के अधिनियम द्वारा विनियमित होता है, लेकिन प्रशासनिक और आर्थिक मामलों में काफी स्वायत्त होता है।

'Thanks To All'

मां पूर्णागिरी विश्वविद्यालय का सपना साकार होने से गदगद डॉ. केएस अधिकारी ने सभी का आभार जताया है। उन्होंने भाजपा प्रदेश मंत्री निर्मल माहरा, जिलाध्यक्ष गोविंद सामंत, महामंत्री मुकेश कलखुड़िया, विधायक प्रतिनिधि प्रकाश तिवारी, दर्जा मंत्री श्याम नारायण पांडेय, मुकेश महराना सहित वरिष्ठ भाजपा नेताओं को भी धन्यवाद ज्ञापित किया है।






Share on Facebook Share on WhatsApp

© 2026. All Rights Reserved.