साहित्यक एवं सांस्कृतिक चेतना मंच की चंपावत में साहित्यिक गोष्ठी
देवभूमि टुडे
चंपावत। चंपावत के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक चेतना मंच की मासिक साहित्यिक गोष्ठी में कवियों ने विविध विषयों को कविताओं के माध्यम से उठाया। चंपावत के श्री कूर्मांचल ऐंग्लो संस्कृत विद्यालय में साहित्य संस्कृति के साथ-साथ सम-सामयिक सामाजिक विषयों को कविता के माध्यम से आवाज दी।
सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. तिलक राज जोशी की अध्यक्षता और अंकित भट्ट के संचालन में हुई काव्य गोष्ठी में राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. भुवन चंद्र जोशी ने इस कविता से शुरुआत की -'मेरे घर से मरघट की दूरी दो कोश नहीं है, जीवन भर गतिमान रहा, चल पाया बस इतनी दूरी।'

अंकित भट्ट ने कहा-'एक दिन आएगा जब सूरज निकलेगा, एक दिन आएगा जब अंधेरा बिखरेगा'।
डॉ. तिलक राज जोशी ने ये कविता पेश की-
'जीवन को नित मौत बनाया, हरने मानव की बेचैनी। मधुर चैन की नींद सुलाया, कितनों को ही गाकर लोरी।'
जन कवि प्रकाश चंद्र जोशी शूल ने अपने विचारों को कविता के रूप में यूं पेश किया-
'मन के उपवन में बसंत, नैनों के अंसुवन में बसंत, आ गया मधुर-मधु टपकाता, सकल मधुवन में बसंत',
हृदयांश जोशी -
'कबूतर करता गुटरगू - खरगोश के सिर में पड़ गये जू। गमले में हैं सुंदर फूल घड़ी कह जाओ स्कूल।',
सेवानिवृत प्रशासनिक अधिकारी राम प्रसाद आर्य ने कहा-
'खिले फूल को ही भ्रमर चूमते हैं, जहां गुड़ वहीं मक्खे घूमते हैं। है जब तक बसंत कोकिले कूकती है, वरना पतझड़ को कोई कहां पूछते हैं।'
रौसाल जीआईसी के प्रवक्ता डॉ. ललित मोहन ने कहा-
'हाथ जोड़ कर मैं विनती करूँगा, आइए इस कवि सम्मेलन को सफल कीजिए।'
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