चंपावत में डॉ. कीर्ति बल्लभ शक्टा के आवास में हुई कुमांऊनी बैठकी होली
अबके उड़ेलुगीं रंग सखी री...
डॉ. र्कीर्ति बल्लभ शक्टा द्वारा लिखित दो पुस्तकों का विमोचन भी हुआ
देवभूमि टुडे
चंपावत। भारतीय संस्कृति में कुमांऊनी बैठकी होली एक अनूठा एवं विशेष महत्व रखती है। इसी लोक आस्था, संस्कृति की परंपरा को संजोए रखने के लिए कलश संगीत कला समिति चंपावत के तत्वाधान में आमलकी एकादशी (रंग एकादशी) के मौके पर राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. कीर्ति बल्लभ शक्टा के मडलक खर्ककार्की स्थित आवास में कुमांऊनी बैठकी होली हुई। कार्यक्रम का श्रीगणेश दीप प्रज्वलित कर गणेश वंदना के साथ किया गया। डॉ. र्कीर्ति बल्लभ शक्टा द्वारा लिखित एंव रचित शक्टावाग्विलास: और उत्तराखंडदेवभूम्याः केदारभूमिः "चम्पूकाब्यम्" किताब का विमोचन किया गया।

इस अवसर पर कुमांऊनी बैठकी होली कार्यक्रम का शुभारंभ गिरीश पंत द्वारा राग काफी में- "बिरज में होली खेले नंदलाल", प्रेम बल्लभ भट्ट द्वारा राग काफी में- "नथुली में उलझेंगे बाल, सिपहया काहे जुलफे बढ़ावे", दिनेश बिष्ट द्वारा राग काफी में- "अबके उड़ेलुगीं रंग सखी री... "बाल कलाकार चिरंजीव आयुष भट्ट द्वारा राग काफी- "अजहू उमर की मैं बाली, डॉ. संतोष पांडेय द्वारा- "मोपे रंग डारो गिरधारी", उमापति जोशी द्वारा राग सहाना- "मोह लिया मन मुरारी सजनी, क्यों मुस्कात चली मृगनयनी", प्रकाश पांडेय द्वारा होली रसिया "होली खेल रहे नन्दलाल, मथुरा की कुंज गालिन में", महेश जोशी द्वारा राग देश- "रंग दीनी राजकुमार" हिमेश कलखुड़िया द्वारा राग देश- "कैसे में जाऊ सेज पिया की, पायल बाजे" होली गीत प्रस्तुत कर खूबसूरत रंग बिखेरे। तबला संगत दिनेश बिष्ट एंव बाल कलाकार चिरंजीव कार्तिक नरियाल, चिरंजीव मंयक नरियाल द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. कमलेश शक्टा, बेबी अवनी, गोपाल पाण्डेय, भैरव दत्त पाण्डेय, राम दत्त जोशी, मनीषा शक्टा, श्रीमती रेवती देवी, फाल्गुनी, किरन पाण्डेय, प्रकाश पाण्डेय आदि संगीत प्रेमी मौजूद थे।


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