चंपावत के सत्र न्यायालय का फैसला
2 अगस्त 2023 को माया आर्या ने की थी आत्महत्या
देवभूमि टुडे
चंपावत। वैवाहिक उत्पीड़न और पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोपित पति को सत्र न्यायालय ने दोषी ठहराया है। चंपावत के सत्र न्यायालय ने आज 9 जून को इस सजा का आदेश दिया। अलबत्ता दहेज प्रतिषेध अधिनियम, दहेज हत्या और हत्या की धाराओं में अभियुक्त को दोषमुक्त करार दिया गया है।
जानकारी के मुताबिक माया आर्या का 28 जून 2022 को प्रेम विवाह हुआ था, लेकिन शादी के 14 माह से भी कम अवधि में 2 अगस्त 2023 को माया आर्या ने आत्महत्या कर ली। विवाह की बेहद कम अवधि में आत्महत्या पर मृतका के पिता ने 6 अगस्त 2023 को चंपावत कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया। आरोपपत्र दाखिल होने के बाद सत्र न्यायालय में मामले की सुनवाई हुई।
चंपावत के सत्र न्यायाधीश जिला जज अनुज कुमार संगल ने तमाम साक्ष्यों, दस्तावेजों और दलीलों का परीक्षण करने के बाद अभियुक्त को तीन धाराओं में दोषमुक्त और दो धाराओं में सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले जिला शासकीय अधिवक्ता विद्याधर जोशी ने बताया कि सत्र न्यायालय ने अभियुक्त संजय कुमार (25) निवाीस दुधौरी, अमोड़ी चंपावत को भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए और 306 में दोषी पाते हुए सजा सुनाई है। जबकि आईपीसी की धारा 304 बी, 302 एवं दहेज प्रतिषेध अधिनियम से दोषमुक्त किया।
सत्र न्यायालय का ये है फैसला:
1.आईपीसी की धारा 498ए में 2 साल की कैद, 25 हजार रुपये अर्थदंड, अर्थदंड नहीं चुकाने पर 3 माह की अतिरिक्त सजा।
2.आईपीसी की धारा 306 में 7 साल की कैद, 50 हजार रुपये अर्थदंड, अर्थदंड नहीं चुकाने पर 6 माह की अतिरिक्त सजा।
3.दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।
4.आईपीसी की धारा 304 बी, 302 एवं दहेज प्रतिषेध अधिनियम से दोषमुक्त किया।
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