Thursday Oct 15, 2026

लोहाघाट विधानसभा सीट

विधायक खुशाल सिंह अधिकारी और जिलाध्यक्ष चिराग सिंह फर्त्याल कभी नहीं आए एक मंच पर

देवभूमि टुडे

चंपावत/लोहाघाट। क्या गुटबाजी कांग्रेस पर भारी पड़ेगा? क्या आरोप-प्रत्यारोप उसे नुकसान पहुंचाएगी? क्या इसका चुनाव नतीजों पर कोई असर पड़ेगा? क्या ये कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है? ये तमाम सवाल लोहाघाट विधानसभा सीट को लेकर उभर रहे है। कांग्रेस में लोहाघाट में खेमेबाजी है। इस कदर गहरी कि कांग्रेस जिलाध्यक्ष और विधायक अब तक किसी भी मंच में एक साथ नहीं आए हैं।

नवंबर 2025 में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष बने चिराग सिंह फर्त्याल और लोहाघाट के विधायक  खुशाल सिंह अधिकारी बीते 11 माह में पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में एक साथ नहीं दिखे। SIR (विशेष सघन पुनरीक्षण) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 3 अक्टूबर को प्रकाशित अंतिम सूची में लोहाघाट सीट में 100802 मतदाता शामिल हैं। यद्यपि छूटे वोटरों को जोड़ने की 20 अक्टूबर तक कवायद चल रही है। लोहाघाट की सीट में कांग्रेस का पलड़ा भारी रहा है। 2002 से अब तक 5 बार हुए विधानसभा चुनाव में 3 बार (2002 व 2007 में कांग्रेस के महेंद्र सिंह माहरा एवं 2022 में कांग्रेस के खुशाल सिंह अधिकारी) कांग्रेस और 2 बार (2012 व 2022 में भाजपा के पूरन सिंह फर्त्याल) भाजपा इस सीट पर काबिज रहे।

 

गुटबाजी के उदाहरण:

1.नवंबर 2025 में चिराग सिंह फर्त्याल कांग्रेस जिलाध्यक्ष बने। लेकिन तबसे अब तक जिलाध्यक्ष फर्त्याल और कांग्रेस विधायक खुशाल सिंह अधिकारी चंपावत जिले में हुए किसी भी कार्यक्रम में एक साथ नहीं आए।

2.कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस साल 28 जून को चंपावत में कांग्रेस कार्यालय में बैठक की। एक दिन बाद 29 जून को लोहाघाट के रामलीला मैदान में जनसभा में हुई। लेकिन इन दोनों कार्यक्रमों में जिलाध्यक्ष एवं विधायक एक साथ नहीं थे। जिलाध्यक्ष 28 जूून वाले कार्यक्रम में थे, तो 29 जून वाली जनसभा में विधायक मौजूद थे। लेकिन दोनों नेता किसी भी कार्यक्रम में साथ नहीं थे।

3.चंपावत विकास भवन में 3 सितंबर को लोहाघाट के विधायक के विरोध कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष शामिल नहीं हुए।

4.लोहाघाट कांग्रेस के कार्यालय का 12 अक्टूबर को उद्घाटन हुआ। कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष के अलावा पूर्व कैबिनेट मंत्री महेंद्र सिंह माहरा, पूर्व दर्जा मंत्री निर्मला महराना सहित कई वरिष्ठ नेता थे, लेकिन इस कार्यक्रम में खुद लोहाघाट के विधायक खुशाल सिंह अधिकारी मौजूद नहीं थे। उन्हें न्यौता दिया गया था, यह भी साफ नहीं है।

क्या कहते हैं कांग्रेस नेता:

कांग्रेस लाोकतांत्रिक दल है। हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का अधिकार है। पार्टी पूरी तरह से एक है। विधायक के रूप में विकास कार्यों और योजनाओं को मंजूर करवाने के लिए मुख्यमंत्री से वार्ता करना सामान्य प्रक्रिया है। भाजपा सरकार को हटाने और हराने में सभी कांग्रेसी पूरी ताकत झोंके हैं।

खुशाल सिंह अधिकारी,

विधायक, कांग्रेस, लोहाघाट।

खुशाल सिंह अधिकारी।

कांग्रेस पार्टी के भीतर मतभेद नहीं है। पार्टी को मजबूत करने के लिए काम किया जा रहा है। वे भी 2027 के चुनाव में लोहाघाट से टिकट के दावेदार हैं। लेकिन ये सच है कि विधायक ने भाजपा के विरोध में हुए कार्यक्रम से लेकर पार्टी के कई विरोध-प्रदर्शनों में हिस्साा नहीं लिया।

चिराग सिंह फर्त्याल,

जिलाध्यक्ष, कांग्रेस, चंपावत।

चिराग सिंह फर्त्याल।






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