एक अखबार लिखता है- अल्ट्रासाउंड सेवा सुचारू दूसरा कहता है- जिला अस्पताल में नहीं हो रहे अल्ट्रासाउंड
देवभूमि टुडे
चंपावत। मीडिया और आम जनता की नजदीकियां कभी नहीं रही। वह ताकत और रसूख के प्रभाव में हमेशा से रहा है, लेकिन इतना भी नहीं जितना अब है। अब ये फासला न पट सकने वाली खाई में तब्दील हो गया है। जिम्मेदारी, जवाबदेदी और भरोसे का संकट है, सो अलग।
मगर आज 24 जुलाई को अखबारों में छपी एक खबर ने तो हद ही कर दी। एक ही समाचार लेकिन दो अलग-अलग तथ्य। पाठकों के सम्मुख दुविधा है कि वह किसको सही मानें किसे गलत?
एक समाचार पत्र लिखता है- 'चंपावत जिला अस्पताल में नहीं हो रहे अल्ट्रासाउंड'। उसका दावा है कि ये बात उसने पड़ताल करने के बाद लिखी है। यहां तक कि अस्पताल के CMS का बयान भी छपा है।

वहीं दूसरा लिखता है-'अल्ट्रासाउंड सेवा फिर शुरू हुई'। इसमें भी स्वास्थ्य अधिकारी का बयान है।

जाहिर है कि कोई एक खबर ही सही होगी, दोनों नहीं। ऐसे में पाठकों के सामने असमंजस होना लाजमी है। वे कैसे जानें कि वास्तव में सही क्या है?
ये है सत्य और तथ्य:
ऐसी परस्पर विरोधाभासी या दुविधा पैदा करने वाली खबरों की सही व तथ्यपरक जानकारी देने में देवभूमि टुडे आपकी मदद करेगा। आज 24 जुलाई को जिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड वाली खबर में वास्तविकता यह है कि कल 23 जुलाई से अल्ट्रासाउंड परीक्षण शुरू हो गए हैं। नैनीताल से रेडियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव जोशी ने कल बृहस्पतिवार को ज्वाइनिंग करने के साथ ही पूर्वान्ह से ही अल्ट्रासाउंड करना शुरू कर दिया था।
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