अधिकांश न्यूज वेबसाइट कट-कॉपी-पेस्ट पर आश्रित और प्रिंट मीडिया में भी आधी-अधूूरी खबरों की भरमार
देवभूमि टुडे
चंपावत। 16 नवंबर को राष्ट्रीय प्रेस दिवस है। सोचा क्यों न अपने क्षेत्र के प्रेस का हाल जान लिया जाए। और ये सिलसिला अगले एक पखवाड़े तक चलेगा। अधिकांश न्यूज वेबसाइट के हाल तो 3-सी (कट-कॉपी-पेस्ट) से आगे के नहीं है। आइए आज शुरू करते हैं क्षेत्र के कुछ प्रमुख प्रिंट मीडिया की चंद खबरों से। वे क्या छाप रहे हैं? क्या छुपा रहे हैं? इस पर बात नहीं होगी। मुद्दा यह कि जो वह पाठकों के सम्मुख परोस रहे हैं, उसमें क्या बताया जा रहा है और क्या छुपाया जा रहा है?
एक साल बाद भरा गया मुख्य शिक्षाधिकारी का पद...इस हेडिंग से 3 प्रमुख अखबारों में आज 2 नवंबर को खबर छपी है। खबर तो अधूरी और अधकचरी है ही, उससे भी ज्यादा हेडिंग में ही तत्थ्यात्मक गलती है। मुख्य शिक्षाधिकारी की कुर्सी 1 साल से नहीं, बल्कि 9 मार्च 2026 से खाल है। यानी सीईओ की कुर्सी को खाली हुए अभी 8 माह नहीं हुए है। तथ्यात्मक रूप से गलत खबर से पाठकों को दिग्भ्रमित करने में कोई 1 नहीं, बल्कि 3 बड़े अखबार बराबर के दोषी हैं। अब बात इससे आगे की। जो मुख्य शिक्षाधिकारी चंपावत आएंगे, वे कहां से आएंगे? अभी तक कहां तैनात थे? स्थानांतर आदेश कब का है? इन सब जानकारी देने की किसी ने भी जरूरत नहीं समझी।
एक और खबर देखिए-एक अखबार लिखता है कि- मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से पशुपालकों में आक्रोश...वाजिब खबर है,पशुपालकों द्वारा उठाई गई परेशानी को बताया गया है। मगर लापरवाही का आलम देखिए। अखबार में पशुपालकों द्वारा 10 अक्टूबर के बाद प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी का जिक्र किया गया है। जबकि सही तारीख 10 नवंबर है। हो सकता है कि मामूली गलती है, विज्ञप्ति जारी करने वालों की ओर से तारीख लिखने में गलती हो या ये पेन इरर हो, लेकिन इतनी छोटी चूक को कई आंखों ने अनदेखा कर दिया।
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