Tuesday Nov 3, 2026

जो छाप दिया वही सच..इस धारणा पर काम कर रहा है आज का ज्यादातर मीडिया

देवभूमि टुडे

चंपावत। क्या सहेली और बहन में अंतर होता है? ये कैसा बेतुका सवाल है, कोई भी कह सकता है। लेकिन यह सवाल उभारा है क्षेत्र के प्रिंट मीडिया के कई सूरमाओं ने। जिन्होंने इस फर्क को जाने या अनजाने मिटा दिया है? या कहें कि खबर की पुष्टि करने के बजाय जैसी आई वैसे लिखने के लहजे से हुआ हो। लेकिन आज 3 नवंबर के अधिकांश प्रमुख अखबारों ने इस गलती को किया है।

चंपावत जिले की एक बहादुर बालिका 2 नवंबर को सुर्खियों में आई। उत्तराखंड की आधा दर्जन बालिकाओं को मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार 2026-27 के लिए चयनित किया गया था। और चंपावत जिले से  ये चयन हुआ सुदूर घुरचुम गांव की माया कांडपाल का। 

माया को 5 अगस्त 2025 को नदी में दो बच्चियों को बहने से बचाने के लिए इस पुरस्कार हेतु चयनित किया गया। जो दो बच्चियां थीं, उनमें से एक थी कोमल और दूसरी थी आरती। कोमल, माया की छोटी बहन थी, जबकि आरती सहेली। लेकिन ज्यादातर अखबारों ने 3 नवंबर के अंक में दोनों को ही सहेली लिख डाला। या तो अखबारनवीसों के लिए सहेली और बहन में कोई फर्क ही नहीं है? या इस अंतर को जानने के लिए पुरस्कार के लिए चयनित परिवार से मालूमात करने की फुर्सत ही नहीं। बस जैसा सुना, वैसा सच मान लिया? ये आज के मीडिया के बड़े हिस्से का सच है। वो सच, जो पाठकों को कुछ भी परोस देने की धारणा पर टिका हुआ है। तथ्य, सत्य और वास्तविकता से वास्ता हो या न हो?






Share on Facebook Share on WhatsApp

© 2026. All Rights Reserved.