चंपावत के सत्र न्यायालय का फैसला
दूसरे फरार अभियुक्त का पता नहीं
वर्ष 2024 में बनबसा के गुदमी भैंसाझाला के ललित सिंह सौन को नौकरी का झांसा देकर बैंकॉक पहुंचाया था जयदीप रामजी टुकड़िया उर्फ जय जोशी ने
देवभूमि टुडे
चंपावत। डंकी रूट के जरिए अवैध रूप से विदेश भेजने वाले एक अभियुक्त को अदालत ने दोषी ठहराया है। गुजरात निवासी इस गुनाहगार को 5 साल की सजा और कुल 32 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
बनबसा के गुदमी भैंसाझाला के गजेंद्र सिंह सौन ने 5 जून 2024 को तहरीर देकर शिकायत की थी कि उनका बेटा ललित सिंह सौन दिल्ली से बैंकॉक गया था, लेकिन वह वहां से लापता हो गया। बाद में ललित सिंह सौन की म्यांमार स्थित चीन द्वारा लीज पर लिए गए किसी द्वीप में मौजूद होने की सूचना मिली। ललित सिंह सौन ने प्रताड़ना और अपहरण की भी शिकायत की थी। तहरीर के आधार पर बनबसा थाने में 10 जुलाई 2024 को मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचना के दौरान राहुल कुमार उपाध्याय एवं जयदीप रामजी टुकड़िया उर्फ जय जोशी (31) निवासी पोरबंदर जिला, गुजरात का नाम प्रकाश में आया। फरार अभियुक्त राहुल कुमार उपाध्याय का पता नहीं चल सका। जबकि जयदीप रामजी टुकड़िया को गुजरात से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर लेकर 15 सितंबर 2024 को न्यायालय में पेश किया गया।
आरोप पत्र दायर होने के बाद सत्र न्यायालय में मामले की सुनवाई शुरू हुई। गवाहों के बयान, दस्तावेजों के परीक्षण, तमाम दलीलों के बाद सत्र न्यायाधीश जिला जज अनुज कुमार संगल ने आज 2 नवंबर को अभियुक्त जयदीप रामजी टुकड़िया उर्फ जय जोशी को दोषी ठहराया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। इस दौरान जेल में व्यतीत की गई अवधि को मुख्य सजा की अवधि में समायोजित करने के आदेश दिए गए हैं। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता केएस राणा ने मामले की पैरवी की।
किन-किन धाराओं में कितनी सजा:
भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी: 5 वर्ष का साधारण कारावास और 5 हजार रुपया जुर्माना। अर्थदंड अदा नहीं करने पर 1 माह की सजा।
भारतीय दंड संहिता की धारा 367: 5 वर्ष का साधारण कारावास और 5 हजार रुपया जुर्माना। अर्थदंड अदा नहीं करने पर 1 माह की सजा।
भारतीय दंड संहिता की धारा 420: 3 वर्ष का साधारण कारावास और 5 हजार रुपया जुर्माना। अर्थदंड अदा नहीं करने पर 1 माह की अतिरिक्त सजा।
भारतीय दंड संहिता की धारा 374: 5 हजार रुपया जुर्माना। अर्थदंड अदा नहीं करने पर 1 माह की अतिरिक्त सजा।
भारतीय दंड संहिता की धारा 323: 1 हजार रुपया जुर्माना। अर्थदंड अदा नहीं करने पर 7 दिन की अतिरिक्त सजा।
भारतीय दंड संहिता की धारा 344: 1 वर्ष का साधारण कारावास और 3 हजार रुपया जुर्माना। अर्थदंड अदा नहीं करने पर 15 दिन की अतिरिक्त सजा।
भारतीय दंड संहिता की धारा 346: 1 वर्ष का साधारण कारावास।
भारतीय दंड संहिता की धारा 347: 1 वर्ष का साधारण कारावास और 3 हजार रुपया जुर्माना। अर्थदंड अदा नहीं करने पर 15 दिन की अतिरिक्त सजा।
भारतीय दंड संहिता की धारा 386: 5 वर्ष का साधारण कारावास और 10 हजार रुपया जुर्माना। अर्थदंड अदा नहीं करने पर 2 माह की अतिरिक्त सजा।
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