Wednesday Aug 12, 2026

चंपावत सत्र न्यायालय का फैसला

टनकपुर में 2024 में हुए गोलीकांड में पिता-पुत्र को सुनाई 7-7 वर्ष की सजा, अर्थदंड भी लगा

देवभूमि टुडे

चंपावत। चंपावत के सत्र न्यायाधीश एवं जिला जज अनुज कुमार संगल की अदालत ने टनकपुर के सनसनीखेज गोलीकांड में विवेचक उपनिरीक्षक सुरेन्द्र सिंह कोरंगा द्वारा की गई उत्कृष्ट एवं वैज्ञानिक विवेचना को सराहते हुए पिता-पुत्र को दोषी करार दिया। न्यायालय ने अभियुक्त कार्तिक ठाकुर (24) को हत्या के प्रयास सहित कई धाराओं में तथा उसके पिता राजीव सिंह (52) को दुष्प्रेरण का दोषी पाते हुए 7-7 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।

8 जुलाई 2024 की रात्रि ग्राम नायकगोठ टनकपुर में राजीव सिंह ने अपने पुत्र कार्तिक को ‘मार दे साले को’ कहकर उकसाया, जिसके बाद कार्तिक ने अपने चाचा दीपक सिंह पर तमंचे से गोली चला दी। गोली पीठ के निचले हिस्से में लगकर पेट से बाहर निकल गई, जिससे पीड़ित का लीवर क्षतिग्रस्त हो गया, डायाफ्राम फट गया और फेफड़ों में मवाद जमा हो गया। बरेली के श्री राममूर्ति अस्पताल में दो जटिल सर्जरियों के बाद ही उनकी जान बच पाई।

उपनिरीक्षक कोरंगा ने घटना के तीसरे ही दिन अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने 12 जुलाई 2024 को कार्तिक ठाकुर की निशानदेही पर किरोड़ा पुल के नीचे पत्थरों में छिपाए गए अवैध तमंचे व दो जिंदा कारतूस बरामद किए। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि विवेचक ने बरामदगी की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई और पेनड्राइव की हैश वैल्यू (डिजिटल फिंगरप्रिंट) लेकर साक्ष्य की अखंडता सुनिश्चित की। फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला ( FSL) देहरादून की रिपोर्ट ने पुष्टि की कि घटनास्थल से बरामद खोखा कारतूस उसी तमंचे से फायर किया गया था। पीड़ित के एमएलसी व सप्लीमेंट्री मेडिकल रिपोर्टों को भी साक्ष्य में शामिल किया गया।

 

न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि स्वयं घायल हुए पीड़ित दीपक सिंह, उनकी पत्नी प्रेमा सिंह व बेटी सोनाक्षी की गवाही अत्यंत विश्वसनीय है। कोर्ट ने बचाव पक्ष के एफआईआर में विलंब, पारिवारिक रंजिश और गवाहों में विरोधाभास वाले सभी तर्कों को खारिज कर दिया।

अदालत ने कार्तिक ठाकुर को धारा 109(1) (हत्या का प्रयास) में 7 वर्ष, धारा 238 (साक्ष्य विलोपन) में 2 वर्ष व धारा 351(3) (धमकी) में 2 वर्ष के साथ अलग-अलग जुर्माने की सजा सुनाई, जबकि राजीव सिंह को दुष्प्रेरण (धारा 49 सपठित 109 (1)) में 7 वर्ष का कारावास व 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी। आर्म्स एक्ट (धारा 25) के आरोप में बरामदगी फर्द में 8 एमएम व 9 एमएम कारतूस की तकनीकी विसंगति तथा सेक्शन आदेश साबित न कराए जाने के कारण कार्तिक ठाकुर को शक का लाभ देते हुए इस धारा से बरी कर दिया गया। न्यायालय ने अर्थदंड की राशि में से 60 हजार रुपये पीड़ित दीपक सिंह को प्रतिकर स्वरूप देने का भी आदेश दिया। दोनों दोषियों को सजायाबी वारंट सहित जिला कारागार पिथौरागढ़ भेज दिया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता विद्याधर जोशी ने पैरवी की।




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