हिंदी दिवस पर चंपावत जिले में कई जगह हुए कार्यक्रम
देवभूमि टुडे
चंपावत। हिंदी दिवस पर आज 14 सितंबर को चंपावत जिले में कई जगह हुई गोष्ठियों में वक्ताओं ने हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग पर जोर दिया। कहा कि हिंदी केवल भाषा का माध्यम ही नहीं, व्यवहार की भी भाषा होनी चाहिए। राजकीय इंटर कालेज सिप्टी के प्रवक्ता सामश्रवा आर्य ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है। यह हमारी आदर्श भाषा भी है। इसका सम्मान तभी होगा, जब इसका व्यवहार में भी उपयोग होगा। उदयन इंटरनेशनल स्कूल चंपावत की सातवीं की छात्रा संस्कृति ने हिंदी को आज भी समुचित स्थान न मिलने पर क्षोभ जताया।

संस्कृति ने कहा कि 'हिंदी में हृदय है, पर आज हृदय में हिंदी नहीं है। छात्रा ने कहा कि अन्य भाषाओं का ज्ञान रखना अच्छी बात है। अपने कौशल और प्रतिभा को बढ़ाना है, किंतु अपनी शिक्षा का माध्यम अपनी मातृभाषा का रहना अलग ही गौरव की बात है। उन्होंने-. 'क्यों भूलते हो हिंदी को, हिंदी से तुम बड़े हुए, हिंदी से ही पढ़-लिखकर तुम, पांव पे अपने खड़े हुए..., कविता का पाठ भी किया।
वहीं जनकवि प्रकाश चंद्र जोशी शूल ने काव्य गोष्ठी के दौरान हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए- ये हिंद देश अपना, शान अपनी हिंदी, ये है स्वेदश अपना, अभिमान अपनी हिंदी, अपमान क्यों समझते हो तुम बोलने मे इसको, ये है परिवेश अपना, पहचान अपनी हिंदी...कविता प्रस्तुत की।
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