Saturday Aug 8, 2026

टनकपुर उप जिला अस्पताल और ट्रामा सेंटर को जोड़ने के लिए मार्ग का निर्माण भी शुरू

2017 में बने टनकपुर ट्रॉमा सेंटर भवन की मरम्मत शुरू

देवभूमि टुडे

चंपाव/टनकपुर। टनकपुर के ट्रॉमा सेंटर (आपातकालीन चिकित्सा सुविधा केंद्र) को इलाज लायक बनाने की कवायद चल रही है। 8 साल पूर्व बने इस ट्रॉमा सेंटर भवन की खामियों को दूर करने सहित अन्य आधारभूत ढांचे को दुरस्त करने का काम इन दिनों चल रहा है। यह काम अगले 3 महीनों में पूरा कर लिया जाएगा। CMO डॉ. देवेश चौहान का कहना है कि सेंटर को जल्द से जल्द संचालित करने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

चंपावत जिले में आकस्मिक सेवाओं को बेहतर करने के लिए 2017 में टनकपुर और लोहाघाट में ट्रॉमा सेंटर बनकर तैयार हुए थे, लेकिन इनका संचालन कभी नहीं हुआ। अलबत्ता अब ये स्थिति बदल सकती है। एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) ऋषिकेश की अधिशासी निदेशक एवं मुख्य अधिशासी अधिकारी प्रोफेसर मुख्य अधिशासी अधिकारी प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह ने 31 मई को टनकपुर के ट्रॉमा सेंटर का निरीक्षण कर इसके जल्द से जल्द संचालन की संभावनाओं को टटोला था। मुआयने और आकलन के अधार पर एम्स की टीम ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी थी। और अब इसके संचालन को लेकर गंभीर कवायद शुरू हो गई है।

सर्वे और रिपोर्ट के बाद इसके संचालन की उम्मीद जगी है। और अब ट्रॉमा सेंटर भवन की छुटपुट खामियों को दूर कराया जा रहा है। सीएनडीएस के परियोजना प्रबंधक जीसी पंत ने बताया कि टनकपुर ट्रॉमा सेंटर भवन की चहारदीवारी मरम्मत, दरवाजे, पुराने शौचालयों को ठीकठाक करने सहित छुटपुट मरम्मत का काम है। इसके अलावा उप जिला अस्पताल एवं ट्रॉमा सेंटर भवन को जोड़ने के लिए करीब 50 मीटर के रास्ते का निर्माण कराया जाएगा। पीएम पंत ने बताया कि 20 लाख रुपये की लागत से ये काम 3 महीने में पूरा करा लिया जाएगा। 

ट्रॉमा सेंटर और अस्पताल को यहां से कनेक्ट किया जाएगा।

संचालन के लिए इन दो शर्तों को पूरा करना है जरूरी:

1.टॉमा सेंटर में उपयोग में आने वाले उपकरण।

2.सर्जन, निश्चेतक, न्योरो सर्जन सहित डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टाफ ।

2.02 करोड़ रुपये से बने हैं दोनों ट्रॉमा सेंटर भवन:

चंपावत जिले में आकस्मिक सेवाओं को बेहतर करने के लिए वर्ष 2017 में 2.02 करोड़ रुपये की लागत से दो ट्रॉमा सेंटर बनकर तैयार हुए थे। लेकिन ये कभी चल नहीं सके। लोहाघाट ट्रॉमा सेंटर का उपयोग ओपीडी मरीजों को देखने और कार्यालय के काम के लिए किया जा रहा है। जबकि टनकपुर के ट्रॉमा सेंटर में पिछले महीने तक पीएसी कर्मियों के आवास, पूर्णागिरी मेला अवधि में बम निरोधक दस्ता और कई कर्मियों के अस्थाई रूप से रहने के काम आ रहा था। अलबत्ता अब इन कर्मियों ने टनकपुर ट्रॉमा सेंटर भवन को खाली कर दिया है।

 

टनकपुर ट्रॉमा सेंटर भवन।




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