लोहाघाट विधानसभा सीट को कांग्रेस से छीनने में धड़ेबाजी बन सकती है राह का रोड़ा
लेकिन पार्टी ने खेमेबाजी से किया इनकार
देवभूमि टुडे
चंपावत/लोहाघाट। भाजपा के संगठन की खास खूबी रही है अनुशासन। पार्टी धड़ेबाजी से दूर मानी जाती है, कम से कम बाहर से तो ऐसा नजर भी आता रहा है। लेकिन लोहाघाट विधानसभा में इन खूबियों पर क्या ग्रहण लग रहा है? खुद भाजपा के भीतर से ऐसी आवाजें उठ रही हैं। कम से कम एक नेता ने तो 2 माह पूर्व गुटबाजी होने का सार्वजनिक आरोप तक लगाया था। अगर धड़ेबाजी को रोका न गया, तो इसका भाजपा के प्रदर्शन पर क्या असर पड़ेगा? एकजुटता की कमी चुनाव नतीजे को किस रूप में प्रभावित करेगा? लोहाघाट सीट को फिर से अपनी झोली में डालने में ये आंतरिक टकराव कितनी बड़ी अचडऩ बनेगा?
लोहाघाट विधानसभा सीट में मुकाबला हर बार सीधा रहा। भाजपा और कांग्रेस के बीच ही यहां सीधी टक्कर रही है। उत्तराखंड बनने के बाद अब तक हुए 5 चुनावों में कांग्रेस 3 बार, तो भाजपा 2 बार सफल रही है। 2022 के चुनाव में ये सीट कांग्रेस के खुशाल सिंह अधिकारी ने जीती थी। जबकि भाजपा की ओर से दोनों बार जीतने वाले अकेले नेता पूरन सिंह फर्त्याल रहे। लेकिन 2022 की चुनाव में हार और उसके बाद जिला पंचायत चुनाव के नतीजों से पार्टी के भीतर उनकी ताकत को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में लोहाघाट सीट से भाजपा के एक पूर्व जिलाध्यक्ष ने चुनाव लड़ा था। और 2027 के चुनाव में ऐसी स्थिति से बचने के लिए पार्टी क्या रणनीति अपनाती है?
गुटबाजी की ये है बानगी...
1.3 साल पूर्व भाजपा में शामिल हुए देवीधुरा क्षेत्र के एक बड़े नेता ने भाजपा में गुटबाजी का सार्वजनिक तौर पर इजहार किया था। तब उन्होंने एक वीडियो के जरिए पार्टी के भीतर धड़ेबाजी को बड़ा खतरा बताया था।
2.लोहाघाट विधानसभा क्षेत्र में पार्टी संगठन में 3 गुट हैं।
3.भाजपा के समर्थक एक बड़ी शख्सियत (जिनके पास कुछ वक्त पूर्व तक उत्तराखंड में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी थी) ने हर हाल चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।
भाजपा प्रत्याशी को लेकर बरकरार है संशय...
लोहाघाट सीट पर भाजपा प्रत्याशी को लेकर इस बार भारी संशय है। दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है। कम से कम 6 नेता टिकट पाने के लिए जुगत लगा रहे हैं। भाजपा 2027 में किस चेहरे को अपना प्रत्याशी बनाती है? क्या भाजपा की झोली में दो बार इस सीट को डालने वाले पूरन सिंह फर्त्याल पर पार्टी
नेतृत्व फिर से विश्वास करेगा? क्या भाजपा इस बार किसी नए चेहरे को टिकट देगी? क्या जो नाम चर्चा में है, उनमें से ही टिकट देगी या किसी नए शख्स को उम्मीदवार बनाएगी?
क्या कहते हैं जिलाध्यक्ष:
भाजपा में गुटबाजी नहीं है। लोकतांत्रिक संगठन होने की वजह से नेता विभिन्न मुद्दों पर पार्टी फोरम में विचार रखते हैं, लेकिन ये खेमेबाजी नहीं है। पार्टी पूरी तरह से एक है। पार्टी नेतृत्व विधानसभा चुनाव में जिसको भी प्रत्याशी बनाएगा, पार्टी पूरी एकजुटता के साथ चुनाव लड़ेगी और विजयी होगी।
गोविंद सिंह सामंत,
जिलाध्यक्ष, भाजपा।

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