काली मंदिर क्षेत्र में 12 दिनों से हो रही पेयजल समस्या
जलकुनिया के स्रोत में लीकेज से संकट का अंदेशा
मंदिर समिति की पेयजल व्यवस्था दुरस्त करने की मांग
देवभूमि टुडे
चंपावत/पूर्णागिरी धाम। भीषण गर्मी के बीच इन दिनों मां पूर्णागिरि धाम का सरकारी मेला चल रहा है। श्रद्धालुओं को अधिक से अधिक सुविधाएं दिलाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन दावों के विपरीत धाम के कई हिस्सों में पेयजल की किल्लत है। खासकर काली मंदिर और उसके आसपास के इलाके में। इस वजह से श्रद्धालुओं के साथ धर्मशाला संचालकों और स्थानीय लोगों को दुश्वारी हो रही है। मंदिर समिति ने पेयजल व्यवस्था दुरस्त करने की मांग की है।
27 फरवरी से शुरू मां पूर्णागिरी धाम के मेले में अब तक करीब 20 लाख श्रद्धालु देवी दर्शन कर चुके हैं। मई के तीसरे हफ्ते में भीषण गर्मी और तपिश के बीच तापमान 30 डिग्री सेल्सियस पार है। ऐसे में भैरव मंदिर के बाद करीब 3 किलोमीटर पैदल चढ़ाई चढ़ श्रद्धालु देवी मां के दर्शन कर रहे हैं। प्रशासन ने तीर्थयात्रियों के लिए बिजली, स्वास्थ्य, सफाई सहित कई उत्तम व्यवस्थाएं की हैं, लेकिन पिछले 12 दिनों से मुख्य मंदिर के पास काली मंदिर क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। मेला क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में जल संस्थान आपूर्ति करता है, लेकिन कुछ जगह की सप्लाई पेयजल निगम के हवाले है। चंपावत में 2 साल पहले 3.97 करोड़ रुपये से पूर्णागिरी के लिए पेयजल योजना बनी थी। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पेयजल निगम की सप्लाई वाले क्षेत्र में पेयजल की कमी से काली मंदिर के आसपास श्रद्धालुओं से लेकर धर्मशाला संचालक और अन्य लोगों को फजीहत झेलनी पड़ रही है। जल निगम के ईई अशोक स्वरूप (7409230003)और जेई जितेंद्र कर्नाटक (9837150223) से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन दोनों इंजीनियर्स से संपर्क नहीं होने से विभागीय पक्ष का पता नहीं चल सका।
क्या कहते हैं मंदिर समिति के पदाधिकारी:
काली मंदिर क्षेत्र में बीते 12 दिनों से पेयजल का संकट है। इस इलाके में पेयजल निगम की योजना से आपूर्ति होती है, लेकिन जलकुनिया के स्रोत में लीकेज आने से ये दुश्वारी आ रही है। आपूर्ति को सुचारू करने के लिए पेयजल निगम और प्रशासन से आग्रह किया गया है, लेकिन फिलहाल समाधान नहीं हो सका है। इस कारण काली मंदिर और आसपास के क्षेत्र में पेयजल की दिक्कत हो रही है।
पंडित किशन तिवारी,
अध्यक्ष, पूर्णागिरी मंदिर समिति।

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