Sunday Apr 12, 2026

देवभूमि व्यंगबाण-7

हम हैं कलमकार! हमें न आए कलम चलाना, क्या फर्क पड़ता? हमें न आए कलम पकड़ना क्या फर्क पड़ता? हम न चलाए कलम क्या फर्क पड़ता? हम जहां कलम चलाने के नाम पर काम करते हो, वहां पेपर न पहुंचता हो, क्या फर्क पड़ता? हमें सचमुच में कोई फर्क नहीं पड़ता। हम इन सबसे ऊपर हैं। बहुत ऊपर हैं। सबसे अजब-गजब हैं। हम लिखते हैं न पढ़ते हैं न पढ़ाते हैं, फिर भी हम ही हम हैं। हम जो भी करते हैं, चमक बिखेरने के लिए करते हैं। हम न बताएं कि जमीन में क्या हो रहा है, लोगों की जरूरतें क्या हैं, उनकी परेशानियां क्या हैं। हम क्यों बताएं उनकी परेशानी, जो जमीन पर पड़े हैं, जरूरतमंद हैं। इसकी हमें क्या जरूरत? जिसको है जरूरत, वह खुद बताए! ये कैसे लोग हैं, जो अपनी तकलीफ भी न बता सकें।

हम कोई उनके जख्मों पर मरहम लगाने के लिए तो हैं नहीं! हम कोई उनकी बात को बताने के ठेकेदार हैं क्या? नहीं, हम ठेकेदार भी हैं, लेकिन उनके नहीं, खुद के लिए हाथ फैलाते हैं। बिना हिचक बिना झिझक, हम वह सब करते हैं, जो भले ही किसी कसौटी पर खरा न उतरता हो, लेकिन हमें ठीक लगता है। 

हम मान्य हैं, हमें मानो भी और जानो भी। हम कौन हैं, आपको क्या पता? हम जो हैं, वह हमारे लिखने-पढ़ने में भले ही न दिखता हो, लेकिन अपने गाड़ी-घोड़े में लिखा हुआ तो है। हम खुद नहीं बताएंगे, पढ़ना आता है, तो पढ़ लें! क्या फर्क पड़ता जिस तिकड़म से हम मान्य हुए, वह लोग न बूझ सकें! हम तो अपना उल्लू साध ही रहे हैं। यहीं तो हमारा मकसद भी है। और इसमें हमारा सक्सेस रेट शत-प्रतिशत है। हम जरूरतमंदों से बेशक दूर हैं, लेकिन जो हमारी जरूरतें पूरी करें, उसके आगे हम लोटपोट होते हैं। यहीं हमारी कामयाबी का फलसफा है। हम लिखने-पढ़ने से बहुत ऊपर हैं, सही-गलत से बहुत आगे हैं, पाठक श्रोता और दर्शक सबसे बहुत दूर हैं। क्योंकि हम मान्य हैं। हमें मानना सबकी मजबूरी है। तभी तो बैठकों में भी हम बेसिरपैर की बात कह कॉलर ऊंचा करने की हिमाकत कर लेते हैं। हम यह बताना भी नहीं भूलते कि दूसरे हमसे दोयम हैं, कमतर हैं। हम इसे हर चौराहे पर बताने से भी चूकते नहीं। हर जगह हम ही हम हैं। धन्य हैं, ऐसे महामनीषी कलमकारों को। जिनके कलम पकड़ने में भले ही पूस की ठंड में भी पसीने छूटते हो, लेकिन उनके पांव पकड़ने की कला अपरंपार है। ऐसे मान्य महारथियों को शत-शत नमन। ऐसे हाल में कलम कमाल करेगा कोई ऐसा सोच भी कैसे सकता है? हां उनके कारनामों की फेहरिस्त जरूर लंबी है!




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