उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ जल संस्थान ने
मुख्यमंत्री को ज्ञापन दे किया आग्रह
देश के 10 पर्वतीय राज्यों में से उत्तराखंड को छोड़ शेष 9 राज्यों में जल संस्थान का राजकीयकरण हो चुका है
देवभूमि टुडे
चंपावत/टनकपुर। उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ (उत्तराखंड जल संस्थान) ने जल संस्थान के राजकीयकरण का सरकार से आग्रह किया है। इसे लेकर संघ के एक प्रतिनिधि मंडल ने 1 सितंबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन दिया है। कहा कि राजकीयकरण का यह मामला वर्तमान में वित्त एवं कार्मिक विभाग में लंबित है।
महासंघ ने कहा कि इस संबंध में 24 अगस्त को उत्तराखंड सरकार के गृह एवं मुख्यमंत्री के सचिव शैलेश बगौली की अध्यक्षता में हुई बैठक में राजकीयकरण को लेकर वित्त एवं कार्मिक विभाग को भी कोई ऐतराज नहीं है। 10 पर्वतीय राज्यों में से 9 राज्य (जम्मू कश्मीर, हिमांचल प्रदेश, अरुणांचल प्रदेश, मणिपुर, सिक्किम, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड) राजकीयकरण का लाभ पहले से ले रहे हैं। पर्वतीय राज्यों में उत्तराखंड ही अकेला राज्य है, जो राजकीयकरण से वंचित है।



ज्ञापन में कहा गया कि जल संस्थान में सबसे ऊपरी स्तर से सबसे निचले स्तर ग्राम पंचायत स्तर के अंशकालिक चौकीदार तक सभी अधिकारी, कर्मचारी व फील्ड स्टाफ पेयजल उपभोक्ताओं, जनप्रतिनिधियों एवं क्षेत्रवासियों से सामंजस्य के साथ पेयजल आपूर्ति सुचारू बनाये रखने का कार्य कर रहे है। वर्तमान में उत्तराखंड जल संस्थान में कुल 9440 अधिकारी, कर्मचारी व फील्ड स्टाफ पेयजल आपूर्ति की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। संस्थान कर्मियों की सेवा एवं मांग के औचित्य को देखते हुए जल संस्थान के राजकीयकरण जरूरी है। ज्ञापन देने वालों में प्रांतीय अध्यक्ष इंजीनियर पंकज उपाध्याय, प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष इंजीनियर बहादुर सिंह एवं प्रांतीय उपाध्याय इंजीनियर परमानंद पुनेठा शामिल थे।
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