चंपावत जिले में हर शनिवार को नो व्हीकल डे घोषित
डीएम के अलावा अन्य अधिकारी भी पैदल कार्यालय पहुंचे
देवभूमि टुडे
चंपावत। तेल संकट के बीच प्रशासनिक स्तर पर डीजल-पेट्रोल की किफायत शुरू हो गई है। इस क्रम में आज शनिवार (23 मई) को चंपावत में डीएम सहित तमाम अधिकारी अपने कार्यालय पैदल पहुंचे। इस दौरान डीएम मनीष कुमार ने आम नागरिकों से संवाद कर उनकी समस्याएं एवं सुझाव सुने और संबंधित अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि छोटे-छोटे प्रयास ही बड़े परिवर्तन का आधार बनते हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति सप्ताह में एक दिन निजी वाहनों का सीमित उपयोग करे और बेवजह ईंधन खर्च से बचे तो इसका समाज एवं पर्यावरण दोनों पर सकारात्मक असर पड़ेगा। डीएम ने कार पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन, पैदल चलने और साइकिल के उपयोग पर भी जोर दिया। इस मौके पर एडीएम केएन गोस्वामी, एसडीएम विपिन पंत, डीएसटीओ दीप्तिकीर्ति तिवारी, डीडीएमओ देवेंद्र पटवाल, सहायक निर्वाचन अधिकारी देवेंद्र अधिकारी, शाकिर हुसैन, चंदन सिंह रावत, आशीष सिंह सहित अन्य अधिकारी-कार्मिक भी कार्यालय तक पैदल आए।



ऊर्जा संकट से निपटने के लिए उठाए जा रहे हैं ये कदम:
1.हर शनिवार को नो व्हीकल डे घोषित किया गया है। जिसके अंतर्गत कार पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन और साइकिल के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।
2.सरकारी बैठकों के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग प्रणाली को प्राथमिकता दी जाएगी। बेहद जरूरी होने पर ही अधिकारियों-कार्मिकों की भौतिक उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी।
3.निजी क्षेत्रों में भी वर्क फ्रॉम होम को प्रोत्सहित किया जाएगा।
4.सरकारी काफिलों में वाहनों की संख्या को तत्काल प्रभाव से 50 प्रतिशत तक सीमित करने के निर्देश।
5.सरकारी एवं निजी भवनों, मॉल, होटल और रेस्तरां में एयर कंडीशनर का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखने अथवा एसी के अनावश्यक उपयोग को हतोत्साहित करने को कहा गया है।
6.अनावश्यक सजावटी प्रकाश व्यवस्था पर नियंत्रण रखने के निर्देश भी दिए हैं।
7.जिले में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ईवी
चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
8.स्वास्थ्य एवं बचत को ध्यान में रखते हुए आशा कार्यकर्ताओं एवं महिला समूहों के माध्यम से कम तेल वाले भोजन के प्रति जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। साथ ही विद्यालयों एवं सरकारी कैंटीनों में तेल के उपयोग की समीक्षा भी की जाएगी।
9.प्राकृतिक खेती एवं जीरो बजट फार्मिंग को बढ़ावा देकर रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। एग्रीस्टैक एवं फार्मर आईडी के माध्यम से उर्वरक प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।
10.पीएम सूर्य घर योजना के अंतर्गत रूफटॉप सोलर परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। नेट मीटरिंग अनुमोदनों की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। साथ ही पीएनजी कनेक्शनों के विस्तार को मिशन मोड में संचालित करने तथा माइनिंग, सोलर एवं पावर प्रोजेक्ट्स को सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से त्वरित मंजूरी प्रदान करने की व्यवस्था की जाएगी।
11.स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए मेड इन उत्तराखंड अभियान के तहत स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प एवं जीआई टैग उत्पादों को बढ़ावा
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