टनकपुर सरस कॉर्बेट महोत्सव में बही सुरों की सरिता
सूफियाना रंगों से सजी शाम
देवभूमि टुड
चंपावत/टनकपुर। टनकपुर सरस कॉर्बेट महोत्सव के चौथे दिन हुई सांस्कृतिक संध्या ने लोक परंपराओं, वीर गाथाओं, क्षेत्रीय संगीत और सूफियाना सुरों का समागम प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की शुरुआत उत्तराखंड की वीर परंपरा को समर्पित प्रस्तुति से हुई। “माधो सिंह भंडारी” की ओजपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को वीर रस से भर दिया। गढ़वाल क्षेत्र के माधो सिंह भंडारी की वीरता, साहस और त्याग की गाथा जब कुमाऊँ की धरती टनकपुर में गूँजी तो दर्शक भावविभोर हो उठे। “टनकपुर में गूँजा वीर माधो सिंह” के नारों और तालियों ने कुमाऊं-गढ़वाल की सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया।







लोकगायक मनोज आर्या ने कुमाऊंनी लोक संगीत की मधुरता बिखेरी। “ढाई हाथे धमेली” और “चहा को होटल” जैसे गीतों पर युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक ने ठुमके लगाए। सांस्कृतिक विविधता की इस श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए भोजपुरी संगीत की प्रसिद्ध गायिका राधा श्रीवास्तव ने मंच संभाला। उनके चर्चित गीत “चटनिया ये सइया सिलवट पर पीसी” की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भोजपुरी लोकधुनों की चंचलता और मधुरता ने वातावरण में नई ऊर्जा भर दी।
सूफी संगीत की मशहूर गायिका ज्योति नूरन की रूहानी आवाज़ ने टनकपुर की संध्या को आध्यात्मिक ऊँचाइयों तक पहुंचा दिया। “पटाखा गुड्डी”, “महादेव”, “अलबेला सजन आयो” और “पाँव की जुत्ती” जैसे लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति पर पूरा पंडाल सुरों में डूब गया। दर्शक देर रात तक सूफियाना रंग में रंगे रहे।
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