चंपावत विधानसभा सीट में 2 बार जीतने वाली कांग्रेस पिछले उप चुनाव में जमानत तक नहीं बचा सकी
कांग्रेस संगठन की हालत पतली
संगठन की कमजोरी के अलावा गुटबाजी से खोखली हो रही कांग्रेस
देवभूमि टुडे
चंपावत। उत्तराखंड बनने के बाद 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में चंपावत विधानसभा सीट से कांग्रेस ने जीत का परचम लहराया था। एक उप चुनाव के साथ अब तक हुए कुल 6 चुनावों में से 2 में कांग्रेस को और 4 में भाजपा को जीत मिली। लेकिन अब कांग्रेस की हालत पतली है। हाल ये कि 2012 के बाद कांग्रेस कभी इस सीट को जीत नहीं सकी। लगातार हार की वजह संगठन की कमजोरी और उससे ज्यादा गुटबाजी है।
चंपावत सीट से 2002 और 2012 में कांग्रेस विधानसभा पहुंची। दोनों बार हेमेश खर्कवाल ने जीत दर्ज की। 2022 के विधानसभा के आम चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को कांटे की टक्कर दी। लेकिन मई 2022 को हुए उप चुनाव में कांंग्रेस साफ हो गई। इस कदर बुरे हाल हुए कि कांग्रेस प्रत्याशी निर्मला गहतोड़ी को सवा 3 हजार से भी कम वोट मिले। जबकि भाजपा के प्रत्याशी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को 58258 (92.94 प्रतिशत) वोट मिले। हार का अंतर तो भारी-भरकम रहा ही, पहली बार पार्टी की जमानत भी जब्त हुई।
इस चुनावी नतीजे के बाद कांग्रेस की हालत में सुधार नहीं, और गिरावट आई है। बीते 4 साल में कांग्रेस कमजोर ही नहीं हुई, बल्कि बुरी तरह रसातल में पहुंची। इसकी संगठन की कमजोरी के साथ ही बड़ी वजह गुटबाजी मानी जा रही है। इन दो बड़ी कमियों ने पार्टी को खोखला कर दिया है, ऐसा राजनीति के जानकारों का कहना है।
गुटबाजी के ये हैं चंद उदाहरण:
1.चंपावत विधानसभा क्षेत्र की नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी ने ही कांग्रेस के एक बड़े नेता पर भितराघात करने का आरोप मढ़ा था।
2.कांग्रेस के जिला स्तर के एक बड़े पदाधिकारी जिम्मेदारी से मुक्त होने के बाद से न केवल पूरी तरह निष्क्रिय हो गए, बल्कि पार्टी के सार्वजनिक कार्यक्रमों से नदारद हैं।
3.चंपावत विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस संगठन में तीन फाड़ है।
कैसे मुकाबला करेगी कांग्रेस?:
चंपावत विधानसभा क्षेत्र के अधिकांश कार्यकर्ता पार्टी को टाटा कर चुके हैं। इनमें से अधिकांश कार्यकर्ता भाजपा में शामिल हो गए हैं। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं के लिहाज से भी पार्टी की हालत एकदम पतली है। कमजोर संगठन और गुटबाजी ने पार्टी की चुनौती को और दुष्कर बना दिया। तो क्या 2027 के चुनाव में कांग्रेस दमखम से चुनाव लड़ने लायक है भी? क्या संगठनात्मक रूप से बेहद सशक्त भाजपा को कांग्रेस टक्कर दे सकेगी? विधानसभा चुनाव में अपने अनुकूल नतीजे के लिए पार्टी क्या कोई ठोस कदम उठाएगी? इन सवालों के जवाब से ही चंपावत सीट पर कांग्रेस का भविष्य तय होगा।
क्या कहते हैं कांग्रेस नेता:
कांग्र्रेस में गुटबाजी नहीं है। अलग-अलग आवाज, अलग-अलग तरह की राय होना किसी संगठन में टकराव का नहीं, लोकतांत्रिक होने का संकेत है। संगठन की कमजोरी को दूर करने के लिए पार्टी नेतृत्व उपाय कर रहा है। कांग्रेस 2027 का विधानसभा चुनाव पूरी ताकत से लड़ेगी।
पूरन सिंह कठायत,
पूर्व जिलाध्यक्ष, कांग्रेस, चंपावत।

© 2026. All Rights Reserved.