3.55 करोड़ रुपये से निर्मित बाल चिकित्सा सघन निगरानी इकाई का अक्टूबर 2025 में लोकार्पण हुआ था
लेकिन नहीं मिल रहा नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों को इलाज
देवभूमि टुडे
चंपावत। भवन और उपकरणों की लागत 3.55 करोड़ रुपये। कार्य पूरा होने और उपकरण लगाए जाने के बाद भवन के बाहर एक बोर्ड भी लगा है। जो बताता है कि 15 अक्टूबर 2025 को PICU (बाल चिकित्सा सघन निगरानी इकाई) का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा लोकार्पण भी किया जा चुका है। लेकिन इस PICU में बच्चों का इलाज शुरू नहीं हो सका है। और आज 23 मई तक इस इकाई में ताला लटका है।
चंपावत जिला अस्पताल परिसर में 32 बैड का PICU बनाया गया है। आदर्श जिले चंपावत की सेहत में सुधार के लिए यह यकीनन बड़ा कदम है, लेकिन इस इकाई को लोकार्पण होने के 7 माह बाद भी शुरू नहीं किया जा सका है। इस कारण नवजात शिशु और छोटे बच्चों को यहां इलाज नहीं मिल पा रहा है। वे उपचार के लिए दूसरे जिलों या निजी अस्पताल की दौड़ लगाने को मजबूर हो रहे हैं। चंपावत जिले में 5 साल और उससे कम आयु के करीब 55 हजार बच्चे हैं।


क्या कहते हैं चिकित्साधिकारी:
CMO डॉ. देवेश चौहान का कहना है कि PICU के लिए सभी उपकरण मिल चुके हैं, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर व कार्मिकों की कमी है। इस कारण इसका संचालन नहीं हो पा रहा है। जिला अस्पताल में एक ही बाल रोग विशेषज्ञ है। PICU के लिए बाल रोग विशेषज्ञ एवं अन्य कार्मिकों की डिमांड भेजी है।

PlCU में मिलती हैं ये सुविधाएं:
अस्पताल के इस सघन निगरानी केंद्र में गंभीर रूप से बीमार बच्चों (नवजात से लेकर किशोर अवस्था तक) की 24 घंटे गहन चिकित्सा और निगरानी की जाती है। गंभीर संक्रमण, सांस की गंभीर बीमारी, दुर्घटना या चोट, दिल की समस्याओं और अंगों के फेल होने की स्थिति वाले बच्चों का यहां इलाज होता है। आधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों का भी उपयोग किया जाता है।
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