राजसेरा तोक में 210 नाली क्षेत्र की चकबंदी का छतकोट ग्राम प्रधान रेखा बोहरा की पहल
ग्रामीणों की सर्वसम्मति से संबंधित पत्र डीएम को भी दिया
देवभूमि टुडे
चंपावत। चंपावत क्षेत्र पंचायत की छतकोट ग्राम पंचायत में ऐच्छिक चकबंदी की पहल की गई है। इसे लेकर ग्राम प्रधान रेखा बोहरा और ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को पत्र दिया है। डीएम मनीष कुमार ने इसे लेकर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।
उत्तराखंड सरकार ने हर जिले के 10 गांवों में स्वैच्छिक चकबंदी का फैसला किया है। इस फैसले के आलोक में छतकोट ग्राम पंचायत के राजसेरा तोक ने ऐच्छिक चकबंदी का आग्रह किया है। इसे लेकर तोक के ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से चकबंदी का अनुरोध किया है। ग्राम पंचायत की खुली बैठक में राजसेरा की नाप भूमि की प्रारंभिक परीक्षण क तौर पर चकबंदी का प्रस्ताव भी पारित किया गया है। शुरुआत में राजसेरा तोक में 210 नाली क्षेत्र में चकबंदी का प्रस्ताव रखा गया है। प्रधान रेखा भट्ट का कहना है कि बिखरी हुई जमीन ग्रामीणों के उपयोग में नहीं आ पा रही है। इससे लोगों की परेशानी के साथ ही पलायन में इजाफा हो रहा है।



चकबंदी से होंगे ये लाभ:
1.भूमि सीमांकन को लेकर विवादों में कमी आएगी।
2.अलग-अलग खेतों के बीच बनी मेड़ चकबंदी के बाद खत्म हो जाती है। इससे खेती योग्य भूमि का क्षेत्रफल बढ़ जाएगा। जमीन का भी सदुपयोग होगा।
3.जमीन और खेत एक जगह होने से समय व ईंधन की बचत होगी। खेतों का आकार बड़ा होने से जुताई, बुवाई, कटाई और निराई के खर्चों में कमी आएगी।
4.बड़े और एक साथ जुड़े हुए खेतों मेें ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और उन्नत सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकी का उपयोग आसान होगा।
5.सिंचाई की बेहतर सुविधा संभव होगी।
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