चंपावत के सत्र न्यायालय का फैसला
रिश्ते की दो नाबालिग भतीजियों से दुष्कर्म करने का आरोप साबित हुआ
ऊधमसिंह नगर जिले के हैं गुनाहगार पति-पत्नी
देवभूमि टुडे
चंपावत। एक दिव्यांग सहित दो नाबालिग बालिकाओं से दुष्कर्म करने के आरोपी पति-पत्नी को अदालत ने गुनाहगार ठहराया है। दोषी दंपती पीड़िता के रिश्तेदार भी हैं। चंपावत के विशेष सत्र न्यायालय ने दोनों गुनाहगारों को 25-25 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा अर्थदंड भी दिया गया है। जुर्माना नहीं देने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
परिजनों की शिकायत के मुताबिक ऊधमसिंह नगर जिले के पचौरिया चकरपुर निवासी इसाक अहमद (39) और उसकी पत्नी मुस्कान (26) पर बहला-फुसला और जादू-टोना कर नाबालिग पुत्री के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। इसाक और मुस्कान दोनों नाबालिग बच्चियों को 5 जनवरी 2026 को अपने घर ले गए और 9 जनवरी को घर वापस छोड़ गए। घटना के करीब 15 दिन बाद दोनों बच्चियों ने बुआ मुस्कान और फूफा इसाक द्वारा दुष्कर्म एवं गलत काम करने की जानकारी परिजनों को दी थी। साथ ही इस बात को किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी थी। दोनों पीड़िताओं के परिजनों की शिकायत पर इस साल 12 फरवरी को बनबसा थाने में POCSO अधिनियम सहित कई अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
18 अप्रैल को आरोपपत्र दाखिल होने के बाद चंपावत के सत्र न्यायालय में मामले की सुनवाई शुरू हुई। सत्र न्यायाधीश जिला जज अनुज कुमार संगल ने तमाम दलीलों, साक्ष्य, गवाहों के बयानों के परीक्षण के बाद दोनों अभियुक्तों को दोषी पाते हुए 5 नवंबर को 25-25 वर्ष की सजा सुनाई। साथ ही 1.05 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना नहीं चुकाने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता केएस राणा ने पैरवी की।
किन धाराओं में क्या सजा दी गई?
1.BNS की धारा 351 (2): 2-2 वर्ष के साधारण कारावास एवं 5-5 हजार रुपये का अर्थदंड। अर्थदंड नहीं देने पर 1-1 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
2.POCSO अधिनियम की धारा 4 (2): 25-25 वर्ष के कठिन कारावास एवं 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड। अर्थदंड नहीं देने पर 6-6 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
3.POCSO अधिनियम की धारा 6: 25-25 वर्ष के कठिन कारावास एवं 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड। अर्थदंड नहीं देने पर 6-6 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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