Tuesday Sep 15, 2026

रिवर्स पलायन एवं स्वरोजगार के लिए दूध के वाजिब दाम और अन्य सुविधाओं की DM के जरिए CM को ज्ञापन भेज की मांग

दुग्ध समितियों के सचिवों के संगठन के जिलाध्यक्ष राजेश सिंह बिष्ट ने समस्याओं के समाधान के लिए नीतिगत, प्रशासनिक और क्रियांवयन के स्तर पर सुधार के लिए उठाई आवाज

देवभूमि टुडे

चंपावत/देवीधुरा। कृषि उपज की तरह ही दूध के लिए भी MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की दुग्ध उत्पादक मांग कर रहे हैं। चंपावत जिले के पशुपालक दूध के वाजिब दाम, पशु आहार की पर्याप्त उपलब्धता, पशु चिकित्सकों की सेवाओं का लाभ पशुपालकों तक पहुंचाने, पशुबीमा व क्लेम सहित कई अन्य सुविधाओं को लेकर आवाज उठ रही है। इसे लेकर दुग्ध समितियों के सचिवों के संगठन के जिलाध्यक्ष राजेश सिंह बिष्ट मुखर हैं। उन्होंने DM के माध्यम से CM को ज्ञापन भेज पशुपालकों की समस्याओं के समाधान के लिए नीतिगत, प्रशासनिक और क्रियांवयन के स्तर पर सुधार करने का आग्रह किया है। बिष्ट ने कहा कि पहाड़ में खेती के साथ पशुपालन आजीविका का बेहद महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन जरूरी सुविधाओं की कमी से पशुपालकों की कमर टूट रही है। ग्रामीण विकास और 'रिवर्स पलायन' को बढ़ावा देने के लिए पशुपालन को सहारा देना जरूरी है। दुग्ध संघ के मुताबिक चंपावत जिले में इस वक्त 272 दुग्ध समितियों के 5533 सदस्य 20500 लीटर प्रतिदिन दूध दुग्ध संघ को दे रहे हैं।

राजेश सिंह बिष्ट।

ये हैं मांगें:

1.हिमाचल प्रदेश की तरह ही उत्तराखंड में भी दूध पर MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) घोषित  हो। गाय के दूध का न्यूनतम मूल्य ₹60 और भैंस के दूध का ₹70 लीटर हो। FAT/SNF की कटौती को तर्कसंगत बनाया जाए।

2.72 घंटे के भीतर वन्यजीव क्लेम का भुगतान हो। वन्यजीवों के हमले में पशुहानि होने पर जटिल कागजी प्रक्रियाओं को खत्म कर ग्राम प्रधान और पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर 72 घंटे के भीतर सीधे बैंक खाते न्यूनतम ₹1 लाख प्रति दुधारू मवेशी का मुआवजा ट्रांसफर दिया जाए।

3.न्याय पंचायत स्तर में साइलेज (चारे), पशु आहार, भूसे का भंडारणः "मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना" के तहत पैक्ड साइलेज (अचार चारा) को ब्लॉक मुख्यालयों से हटाकर हर ग्राम पंचायत स्तर पर 80% सरकारी सब्सिडी के साथ, गुणवत्ता वाला पशु आहार, भूसा 60% सरकारी सब्सिडी के साथ उपलब्ध कराया जाए।

4.अनिवार्य एवं मुफ्त पशुधन बीमाः राज्य के सभी सीमांत पशुपालकों के पशुओं का 100% प्रीमियम राज्य सरकार स्वयं वहन करे ताकि किसी भी आपदा या बीमारी में पशु की मृत्यु होने पर किसान बर्बाद न हो।

5.पर्वतीय क्षेत्रों के पशु अस्पतालों में डॉक्टरों की 100% उपस्थिति और आपातकालीन दवाओं का स्टॉक सुनिश्चित किया जाए।

6.पशुपालकों की इन सभी जरूरतों की पूर्ति न होने स्थिति में जिले के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही हो।

7.जिले में निवासरत क्षेत्रीय कर्मचारियों को उनके गृहक्षेत्र से दूसरे जिलों में स्थानांतरित किया जाए।

क्या कहते हैं अधिकारी:

दूध के दाम निर्धारित करने का फार्मूला वसा एवं SNF (सॉलिडी नॉट फैट) पर आधारित है। इसके आधार पर दूध की कीमतें अलग- अलग हैं। चंपावत जिले में अमूमन ये कीमतें 22 रुपये से 40 रुपये प्रति लीटर तक है। इस दाम के अलावा प्रति लीटर 4 रुपये बोनस भी दिया जाता है।

जीएस राणा,

प्रबंधक, दुग्ध संघ, चंपावत।






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