29 साल के चंपावत जिले को विकास और आम नागरिकों को लाभ देने के लिए बढ़ाने होगी रफ्तार
15 सितंबर 1997 को सूजितत हुआ था चंपावत जिला
देवभूमि टुडे
चंपावत। चंपावत के लिए खास है 15 सितंबर का दिन। बदलाव का दिन है। पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर से अलग हो आज से 29 साल पहले एक नया जिला बना था। 1997 में उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने रुद्रप्रयाग और बागेश्वर के साथ चंपावत को जिला बनाने का ऐलान किया था।
15 सितंबर 1997 को चंपावत जिले के सृजित होने का शासनादेश हुआ था। जिले के इस सफर को आज 29 साल पूरे हो गए हैं। लेकिन ये खास दिन होने के बावजूद चंपावत जिले के पास क्या इस अवधि में उतनी उपलब्धियां हैं, जो होनी चाहिए थी? इस पर हर पक्ष की अपनी-अपनी दलीलें हैं। मगर आम नागरिकों के नजरिए से देखें, तो जितना हुआ है, उससे काफी ज्यादा होना चाहिए था। लेकिन विकास की गति धीमी है। इसमें रफ्तार की जरूरत है। लोगों का कहना है कि जिला बनने के बाद चंपावत और पर्वतीय क्षेत्रों की जमीन की कीमतें आसमान छूई। समस्याएं, समाधान, अनुत्तरित सवालों की तरह ही चुनौतियां भी कम नहीं हैं। ये चुनौतियां रोटी-कपड़ा और मकान से लेकर पढ़ाई-कमाई और दवाई तक की है।
ये रहीं उपलब्धियां:
1.चंपावत में एमआरआई मशीन का संचालन शुरू, ब्लड कंपोनेंट यूनिट भी शुरू हुई।
2.लोहाघाट में महिला स्पोट्र्स कॉलेज का निर्माण कराया जा रहा है।
3.टनकपुर में आईएसबीटी और चंपावत रोडवेज स्टेशन में सिटी सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है।
4.मैदान में शारदा और पहाड़ में गोल्ज्यू कॉरिडोर परियोजना निर्माणाधीन है।
5.चंपावत और टनकपुर में UUSDA (उत्तराखंड शहरी विकास क्षेत्र) के जरिए पेयजल योजना का विस्तार किया जा रहा है।
6.पूर्णागिरी में रोपवे कार्य चल रहा है।
7.पार्किंग सहित कई आधारभूत ढांचों के निर्माण में तेजी आई।
8.जिम कॉर्बेट ट्रेल का संचालन।
9.कोलीढेक झील, चंपावत चाय बागान को इको टूरिज्म से जोड़ा गया, एबटमाउंट में इको हट सहित पर्यटन क्षेत्र का विस्तार।
इन समस्याओं का नहीं हुआ समाधान:
1.चंपावत में PICU (बाल सघन निगरानी केंद्र) का अक्टूबर 2025 को लोकार्पण होने के बावजूद संचालन शुरू नहीं हो सका।
2.जिले के सबसे अधिक आबादी वाले टनकपुर के उप जिला अस्पताल की लचर स्वास्थ्य सेवा। विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने से लंबे समय से हड्डी का इलाज
नहीं, गर्भवती महिलाओं के लिए इंतजाम नहीं, शिशुओं के उपचार का बंदोबस्त नहीं, जनरल सर्जरी की सुविधा भी नहीं।
3.भवन पूरा होने के 9 साल बाद भी टनकपुर और लोहाघाट के ट्रामा सेंटर संचालन शुरू नहीं हो सका।
4.चंपावत जिले में करीब 10 प्रतिशत क्षेत्रों में अभी भी मोबाइल नेटवर्क नहीं।
5.चंपावत जिले के 4 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में 8 साल से ताले लटके हैं।
6.चंपावत के एसएसजे विश्वविद्यालय परिसर में एक भी स्थाई सहायक प्रोफेसर
नहीं, निदेशक की जिम्मेदारी भी अल्मोड़ा से संभाली जा रही।
7.औद्योगिक आस्थान भी उद्योग से दूर।
8.श्यामलाताल पर्यटक आवास गृह में वर्ष 2014 से लटके हैं ताले।
9.उप्र के समय बने भवन के बावजूद कोल्ड स्टोर का संचालन शुरू नहीं हो सका। इस भवन को प्राइवेट संस्था को लीज पर दिया गया है।
चंपावत जिले के सम्मुख ये भी है चुनौती:
1.चंपावत जिले के बनबसा में सिडकुल का सपना अधूरा।
2.कूर्म सरोवर और डिप्टेश्वर झील के काम में दूर हुईं अड़चनें।
3.बाराकोट ब्लॉक और तहसील मुख्यालय है, लेकिन यहां एक भी डिग्री कॉलेज नहीं।
4.चंपावत के स्टेडियम का सपना अधूरा।
5.चंपावत रोडवेज स्टेशन में 62 करोड़ रुपये से अधिक का सिटी सेंटर बन रहा है, लेकिन चंपावत में न बसें और नहीं रोडवेज डिपो।
6.चंपावत के राजबुंगा किले को संग्रहालय का रूप नहीं मिल सका।
7.चंपावत जिले में खेती के आड़े आ रहे जंगली जानवर से निजात दिलाने की कोई कारगर व्यवस्था नहीं।
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