सिल्ट आने से दो दिन से ठप आदर्श जिले चंपावत की क्वैराला पेयजल योजना
30.88 करोड़ रुपये की लागत से 2022 में निर्मित इस योजना में सिल्ट का कारगर इंतजामात नहीं
देवभूमि टुडे
चंपावत। बारिश में भी पेयजल आपूर्ति नहीं। जी हां, ऐसा ही है। ये हाल आदर्श जिले के मुख्यालय के हैं। उस क्वैराला पेयजल योजना के हैं, जिसका संचालन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चंपावत के विधायक बनने के करीब 2 माह बाद जुलाई 2022 से किया जा रहा है। 30.88 करोड़ रुपये से निर्मित 17 किमी लंबी इस योजना से 30 वर्षों तक 29 हजार लोगों की जरूरत पूरी होनी है। इस योजना का शुमार उपलब्धियों की फेहरिस्त में तो है, लेकिन बारिश होने पर अक्सर इस योजना से पानी की सप्लाई बाधित हो जाती है। 2026 में भी 7 से अधिक बार इस योजना ने दगा दिया है। कल 27 सितंबर से भी चंपावत शहर के काफी बड़े हिस्से में क्वैराला की पेयजल सप्लाई पर असर पड़ा।
25 सितंबर की शाम से चंपावत में 27 सितंबर के पूर्वान्ह तक बारिश हुई। इस दौरान करीब 259 मिलीमीटर बारिश हुई। मेघ खूब बरसे, लेकिन शहर के काफी बड़ी आबादी के नलों में सूखा रहा। इस वजह से नागरिकों को पेयजल किल्लत से जूझना पड़ा। प्यास बुझाने के लिए उन्हें दूसरे वैकल्पिक उपायों का सहारालेना पड़ा। वैसे चंपावत क्षेत्र में छीड़ापानी, ललुवापानी, रौखेत, च्यूराखर्क, चौड़देव, दियारखोला, सौडख़ोला, थूम, थैण, दुगधारी और सिमाल स्रोतों से भी पेयजल आपूर्ति होती है, लेकिन इनसे मामूली पानी ही मिलता है।
नागरिकों की ओर से एक सवाल अक्सर पूछा जा रहा है कि क्या 30 करोड़ से अधिक लागत की क्वैराला पंपिंग योजना में सिल्ट आने से बचाव का पुख्ता उपाय नहीं है? क्या बरसात में करोड़ों की यह योजना पेयजल की आपूर्ति करने लायक नहीं है? या योजना बनाते समय गुणवत्ता से समझौता किया गया? हो चाहे जो भी, लेकिन इन सबका खामियाजा आम नागरिक भुगत रहे हैं।
क्या कहते हैं अभियंता:
क्वैराला पंपिंग योजना की आपूर्ति करने वाली क्वैराला नदी में बारिश की वजह से भारी मात्रा में सिल्ट एकत्र हो गई। फिल्टर लगे होने के बावजूद बारिश होने पर सिल्ट की समस्या कई बार आती है। 2 दिन की बारिश से 2 पंप नहीं चले। इस वजह से सप्लाई पर असर पड़ा। कल बारिश की वजह से बंद थी। आज 28 सितंबर को अपरान्ह 1 बजे तक चली है। 600 केएल और 400 केएल के टैंकों में आज स्टॉक कराया जा रहा है। कल 29 सितंबर की सुबह 6 बजे से सप्लाई सुचारू होगी।
विपिन विश्वकर्मा,
अपर सहायक अभियंता, चंपावत।
योजना से रोजाना होती है 12 लाख लीटर पानी की सप्लाई:
चंपावत। जल संस्थान की अगर मानें, तो क्वैराला पंपिंग योजना चंपावत नगर क्षेत्र की प्यास बुझाने में बड़ी भूमिका निभा रही है। यानी कि इससे डिमांड-सप्लाई में संतुलन बना है। विभागीय आकड़ों के मुताबिक क्वैराला पेयजल योजना के संचालन से पूर्व चंपावत नगर क्षेत्र में 12 लाख लीटर की रोजाना मांग थी, मगर आपूर्ति 7 लाख लीटर ही हो पाती थी। परंतु योजना बनने के बाद से 17 लाख लीटर की मांग और 17 लाख लीटर की आपूर्ति हो रही है। ये जल संस्थान के डिवीजन कार्यालय का दावा है।
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