टनकपुर बनबसा बाईपास बनाओ संघर्ष समिति ने जताया विरोध
कहा-फोरलेन से बड़ी संख्या में लोगों के सामने आजीविका और विस्थापन का भी संकट खड़ा होगा
देवभूमि टुडे
चंपावत/टनकपुर। सितारगंज-टनकपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के बनबसा से टनकपुर तक के करीब 12 किलोमीटर हिस्से को फोरलेन में परिवर्तित करने पर टनकपुर-बनबसा क्षेत्र के कई लोगों ने विरोध जताया है। इस चौड़ीकरण के विरोध एवं आबादी क्षेत्र से बाहर बाईपास निर्माण की मांग को लेकर टनकपुर बनबसा बाईपास बनाओ संघर्ष समिति के महामंत्री दीप चंद्र पाठक के नेतृत्व में आज 25 मई को बड़ी संख्या में प्रभावित परिवारों ने तहसील कार्यालय पहुंचकर सामूहिक एवं व्यक्तिगत आपत्तियां दर्ज कराई।



समिति के प्रतिनिधिमंडल ने टनकपुर के एसडीएम विपिन चंद्र पंत से भेंट कर क्षेत्र की वास्तविक स्थिति, प्रभावित परिवारों की समस्याओं, प्रस्तावित चौड़ीकरण से होने वाले नुकसान एवं आर्थिक नुकसान की जानकारी दी। कहा कि वर्तमान प्रस्ताव से बड़ी संख्या में आवासीय भवन, व्यापारिक प्रतिष्ठान, विद्यालय एवं अन्य जनसुविधाएं पर असर पड़ेगा। साथ ही बड़ी संख्या में लोगों के सामने आजीविका और विस्थापन का भी संकट खड़ा हो जाएगा। समिति ने मांग की कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में चौड़ीकरण करने के बजाय नगर एवं आबादी क्षेत्र से बाहर उपयुक्त स्थान पर बाईपास का निर्माण किया जाना चाहिए। ताकि यातायात सुगम होने के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों के हितों की भी रक्षा हो सके।
कार्यक्रम के दौरान कई स्थानीय जन प्रतिनिधियों, सभासदों एवं ग्राम प्रधानों ने भी प्रभावितों की मांगों का समर्थन करते हुए प्रभावित परिवारों के साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया। संघर्ष समिति ने कहा कि ये संघर्ष लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से आगे भी जारी रहेगा।
संघर्ष समिति की ये हैं दलीलें:
1.नगर के भीतर से गुजरने वाली वर्तमान सड़क पर बढ़ते यातायात, भीड़भाड़ व दुर्घटनाओं के अंदेशा से फिक्रमंद लोगों का कहना है कि फोरलेन से सड़क किनारे स्थित दर्जनों विद्यालयों में पढ़ रहे हजारों बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठेंगे।
2.क्षेत्रवासियों के व्यापार, आवास एवं कृषि भूमि को होने वाले नुकसान।
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