Tuesday Jun 2, 2026

AIIMS की अधिशासी निदेशक प्रोफेसर मीनू सिंह ने किया ट्रॉमा सेंटर का मुआयना

जल्द से जल्द संचालन को लेकर संभावनाओं को टटोला

इमरजेंसी एयर एंबुलेंस के लिए हेलीपैड सुविधा, अस्पताल के आईसीयू, ब्लड

स्टोरेज यूनिट, ऑक्सीजन प्लांट आदि के निरीक्षण के साथ अस्पताल को ट्रॉमा सेंटर से लिंक करने के विकल्प पर भी चर्चा हुई

एम्स की टीम ने ढाई साल में दूसरी बार किया मुआयना

देवभूमि टुडे

चंपावत/टनकपुर। क्या ट्रॉमा सेंटर (आपातकालीन चिकित्सा सुविधा केंद्र) में इलाज मिल सकेगा? ये सवाल बीते 8 साल से पूछा जा रहा है। चंपावत जिले में दो (लोहाघाट और टनकपुर) ट्रॉमा सेंटर हैं, लेकिन इलाज एक में भी नहीं मिलता है। अब ये हालात बदल सकते हैं, ऐसा कहा जा रहा है। दरसल AIIMS (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) ऋषिकेश की अधिशासी निदेशक एवं CEO (मुख्य अधिशासी अधिकारी) प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह ने कल 31 मई को टनकपुर के ट्रॉमा सेंटर का निरीक्षण कर इसके जल्द से जल्द संचालन की संभावनाओं को टटोला।

मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. घनश्याम तिवारी ने बताया कि यहां किए मुआयने और आकलन के अधार पर एम्स की टीम रिपोर्ट शासन को भेजेगी। जिसके बाद इसके संचालन पर फैसला होगा।

AIIMS निदेशक ने ट्रॉमा सेंटर भवन और सुविधाओं का जायजा लिया। टीम ने इमरजेंसी एयर एंबुलेंस के लिए हेलीपैड सुविधा के अलावा उप जिला अस्पताल के आईसीयू, ब्लड स्टोरेज यूनिट, ऑक्सीजन प्लांट आदि का निरीक्षण कर जरूरी जानकारी जुटाई। उप जिला अस्पताल को ट्रॉमा सेंटर से लिंक करने के विकल्प पर भी विचार किया गया। इस वक्त जिला अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर के गेट के बीच करीब 200 मीटर का फासला है। मुआयने के दौरान उप जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. घनश्याम तिवारी, डॉ. मोहम्म्द उमर आदि कई स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद थे।

चंपावत के विधायक और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी टनकपुर के ट्रॉमा सेंटर को शीघ्र संचालित कर क्षेत्र की इमरजेंसी हेल्थ सिस्टम को गुणवत्तायुक्त बनाना चाहते हैं। इसीलिए यहां यह सर्वे किया गया है। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर इसके संचालन को लेकर सरकार अगला निर्णय लेगी। वैसे इससे पूर्व अक्टूबर 2023 में भी AIIMS की एक टीम ने एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मधुर उनियाल के नेतृत्व में इस ट्रॉमा सेंटर का निरीक्षण किया था।

बैठक में जानकारी लेती निदेशक प्रो. मीनू सिंह।

संचालन के लिए ये शर्ते पूरा करना है जरूरी:

1.टॉमा सेंटर में उपयोग में आने वाले उपकरण।

2.सर्जन, निश्चेतक, न्योरो सर्जन सहित डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टाफ ।

3.भवन की खामियों को दूर करना होगा।

ट्रॉमा सेंटर भवन में कहीं पीएसी कर्मी रह रहे कहीं ओपीडी मरीज का हो रहा इलाज:

चंपावत। चंपावत जिले में आकस्मिक सेवाओं को बेहतर करने के लिए वर्ष 2017 में 2.02 करोड़ रुपये की लागत से दो ट्रॉमा सेंटर बनकर तैयार हुए थे। लेकिन ये कभी चल नहीं सके। लोहाघाट ट्रॉमा सेंटर का उपयोग ओपीडी मरीजों को देखने और कार्यालय के काम के लिए किया जा रहा है। जबकि टनकपुर के ट्रॉमा सेंटर में पीएसी कर्मियों के आवास, पूर्णागिरी मेला अवधि में बम निरोधक दस्ता और कई कर्मियों के अस्थाई रूप से रहने के काम आ रहा है।

ट्रॉमा सेंटर भवन।




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