हमारी आन तुमसे है तुम्हें हम याद करते हैं।
हमें अभिमान तुम पर है तुम्हें हम याद करते हैं।
चुका सकते नहीं हम तुम्हारे बलिदान का वो ऋण।
हमारा मान तुमसे है तुम्हें हम याद करते हैं।
पूजा पाषाण हमने है पूजा है माटी को।
नमन रामेश्वरम को है और कश्मीर घाटी को।
मन के मणिपुर में बसा है सोमनाथ धाम।
नमन-वन्दन तुम्हें मेरी तुम्हें हम प्रणाम करते हैं।
जनकवि शूल निरौ सदन क्वेरालाघाटी, चंपावत।
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