16 साल के बीमार को तल्लादेश के सोराई गांव से 7 किलोमीटर डोली तक रोड पर लाए फिर निजी वाहन से 31 किलोमीटर दूर चंपावत अस्पताल पहुंचाया
रोड न इलाज बस डोली ही आसरा
800 की आबादी वाली सोराई ग्राम पंचायत न केवल रोड से कटा है, बल्कि इलाज की मामूली व्यवस्था भी नहीं
देवभूमि टुडे
चंपावत/तल्लादेश। नेपाल सीमा के तल्लादेश का हिस्सा है सोराई। सीमांत क्षेत्र से लगा गांव है, लेकिन सुविधाओं का अकाल है। रोड से लेकर इलाज तक की बुनियादी सुविधाएं कमोबेश नदारद हैं। एक महीने में दूसरी बार डोली से बीमार को अस्पताल तक पहुंचाया गया।
चंपावत के सौराई गांव के 16 साल के पंकज सिंह पुत्र बची सिंह की कल 22 जुलाई की शाम एकाएक पेट में तेज दर्द हुआ। रात किसी तरह गुजारने के बाद आज 23 जुलाई की सुबह गांव के लोगों ने पंकज को सौराई से 7 किलोमीटर दूर मंच गांव तक डोली से पहुंचाया। इस फासले को पार करने में करीब ढाई घंटे लगे। मंच से निजी वाहन से किशोर को चंपावत के एक निजी अस्पताल लाया गया। अल्ट्रासाउंड परीक्षण और अन्य इलाज के बाद पंकज सिंह की तबीयत में सुधार हुआ। लेकिन इस पूरे वाकये ने सीमांत के गांव की बदहाली और विकास के खोखलेपन को उजागर कर दिया। इलाज से पहले डोली की ये बेबसी गांव तक सड़क न होने की वजह से है।

एक माह में दूसरा मामला:
चंपावत। तल्लादेश के सौराई क्षेत्र में ही डोली और खच्चर की मदद से बीमार को अस्पताल तक पहुंचाने का यह दूसरा मामला है। बची सिंह बताते हैं कि 27 जून को उनकी बेटी रेखा की तबीयत भी बिगड़ी थी। रेखा को खच्चर से सौराई से मंच तक लाया गया। फिर जीप से चंपावत पहुंचा इलाज कराया।

रोड न इलाज बस डोली ही आसरा:
चंपावत। सौराई के पूर्व ग्राम प्रधान दान सिंह कहते हैं कि सौराई तक रोड नहीं है। गांव पहुंचने के लिए 7 किलोमीटर पैदल चलना नागरिकों की मजबूरी है। रोड मंजूर है, लेकिन बनना तो दूर, अभी काम शुरू होने की भी स्थिति नहीं बनी है। दान सिंह बताते हैं कि 22 किलोमीटर लंबी खेत-भनार-हर्तोला-सौराई सड़क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से मंजूर है, लेकिन अभी सर्वे से आगे मामला नहीं पहुंचा है। ऐसे में रोड का काम कब शुरू होगा और काम कब पूरा होगा? ये यज्ञ प्रश्र है। पूर्व प्रधान कहते हैं सड़क की कमी के साथ गांव में इलाज की भी कोई व्यवस्था नहीं है।

© 2026. All Rights Reserved.