माखन के नित चोर कन्हैया तुमको मेरा प्रणाम।
गोपियों के चितचोर कन्हैया तुमको मेरा प्रणाम।
भादौं माह-मध्य रात-कृष्ण पक्ष और तीथ अष्टमी
छाई घटा घनघोर कन्हैया तुमको मेरा प्रणाम।
कोख धन्य की मां देबकी की जब लिया जनम।
छाई खुशी चहुंओर कन्हैया तुमको मेरा प्रणाम।
रातों-रात की अदला-बदली पिता बासुदेव ने।
फिर सुख की हो गई भोर कन्हैया तुमको मेरा प्रणाम।
गीता के सृजक-उपदेशक अरु न्याय पक्षधर।
निज प्रजा के मनमोर कन्हैया तुमको मेरा प्रणाम।
अखिल जगत को ज्ञानयोग से कर्म की शिक्षा।
दिया सत्कर्मों पर ही जोर कन्हैया तुमको मेरा प्रणाम।
दल कंस-कौरव को हार दिलाई धर्मयुद्ध में माधव!
मिली विजय-श्री चहुंओर कन्हैया तुमको मेरा प्रणाम।
भगत रमे हैं सतत भक्ति में तेरी हे! किशन सुनो!
तुम्हें ही सौंपी जीवन-डोर कन्हैया तुमको मेरा प्रणाम।
प्रभु! तम से उबारो हम फंसे हुए हैं दु:खों के शूल भंवर में ना हमें दिखे कोई छोर कन्हैया तुमको मेरा प्रणाम।
जनकवि प्रकाश जोशी शूल क्वेरालाघाटी चम्पावत उत्तराखण्ड।
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