Monday Aug 31, 2026

वर्ष 2017 से अब तक 80 सरकारी स्कूल हो चुके हैं बंद

देवभूमि टुडे विशेष

चंपावत जिले के सरकारी स्कूलों से हो रहा मोहभंग

पूर्णागिरी क्षेत्र के कोटकेंद्री का प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल दोनों में ताले

देवभूमि टुडे

चंपावत। सरकारी स्कूलों को लेकर नौनिहालों में उत्साह कम हो रहा है। न केवल प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों की संख्या में कमी आ रही है, बल्कि नौनिहालों की संख्या में भी लगातार गिरावट आ रही है। चंपावत जिले के 9 स्कूलों में इसी शिक्षा सत्र में ताले लटक चुके हैं।

चंपावत जिले में 2026-27 के शिक्षा सत्र शुरू होने के साथ ही 8 प्राथमिक स्कूल और एक उच्च प्राथमिक स्कूल बंद हो गए हैं। इन सभी स्कूलों में कोई भी छात्र नहीं होने से इनमें ताले लटक गए हैं। पूर्णागिरी धाम क्षेत्र के कोटकेंद्री के दोनों (राजकीय प्राथमिक स्कूल और उच्च प्राथमिक स्कूल) विद्यालय बंद हो चुके हैं। इन सभी स्कूलों में पिछले साल 1 से लेकर 4 तक छात्र-छात्राएं थे।

चंपावत जिले में 447 प्राथमिक विद्यालय और 88 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें कुल 11354 (प्राथमिक में 5762 एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों में 5592) छात्र-छात्राएं हैं। जबकि तीन साल पूर्व 2023 में विद्यार्थियों की ये संख्या 12891 थी।

कोटकेंद्री प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय।

2026 में बंद स्कूल (9):

राजकीय प्राथमिक विद्यालय बेट्टा, कोटकेंद्री, मंगरिया, बड़ोली, डाबरी, पिनाना तलाड़ी, स्यूतोला और बालातड़ी तथा राजकीय उच्च प्राथमिक विद्याालय कोटकेंद्री।

2025 में बंद स्कूल (7):

राजकीय प्राथमिक विद्यालय नैलोड़ी, उदाली, नई बलाई, नौलिया, चौड़ा सिल्योड़ी, धूरा गोली और आमड़ा।

क्या कहते हैं अधिकारी:

वर्ष 2026 में 8 प्राथमिक और 1 उच्च प्राथमिक स्कूल बंद हो गए हैं। छात्र संख्या शून्य होने से ये विद्यालय बंद हुए हैं। इन स्कूलों में तैनात शिक्षकों को अन्यत्र समायोजित किया गया है।

मान सिंह,

मुख्य शिक्षाधिकारी, चंपावत।

CEO मान सिंह।

रोड व सुविधाओं की कमी आ रही आड़े: प्रधान तिवारी:

चंपावत। चंपावत जिले के जिन क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में ताले लटक गए हैं, उन क्षेत्रों में ज्यादातर जगह बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। या तो सड़क नहीं है और अगर सड़क है, तो दूसरी जरूरी सुविधाएं नहीं है। पूर्णागिरी धाम क्षेत्र के कोटकेंद्री में एक नहीं दोनों स्कूल बंद हो गए हैं। कालीगूंठ (पूर्णागिरी क्षेत्र) के ग्राम प्रधान पंडित पंकज तिवारी कहते हैं कि कोटकेंद्री गांव सड़क विहीन गांव है। गांव तक पहुंचने के लिए चार किलोमीटर पैदल दूरी लांघनी पड़ती है। सड़क से फासला होने से क्षेत्र के लोग पलायन को मजबूूर हैं। गांव में अब गिनेचुने परिवार ही रह गए हैं। इसके अलावा कई ऐसे इलााके भी हैं, जहां रोड तो हैं, लेकिन दूसरी सुविधाएं नदारद हैं। जरूरी सहूलियतें नहीं होने से लोग बच्चों की खातिर दूसरी जगह जाने को मजबूर हैं।

प्रधान पंडित पंकज तिवारी।






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