Saturday Sep 19, 2026

नीति आयोग की रिपोर्ट से हुआ खुलासा

भारत में 15 से 29 वर्ष की आयु के करीब 8.7 करोड़ युवा न तो पढ़ाई कर रहे हैं न कोई नौकरी कर रहे हैं और नहीं किसी प्रकार का ले रहे प्रशिक्षण

दिल्ली। देश में 8.7 करोड़ युवा न तो पढ़ाई कर रहे हैं और न ही नौकरी। नीति आयोग की रिपोर्ट से ये खुलासा हुआ है। नीति आयोग के अनुसार कमजोर वित्तीय स्थिति वाले NEET (Not in Education, Employment, and Training) युवाओं और महिलाओं को किफायती या सब्सिडी वाली ट्रेनिंग के साथ-साथ वित्तीय सहायता की आवश्यकता है।

नीति आयोग की एक नई रिपोर्ट ने चिंताजनक खुलासे किए हैं। भारत में 15 से 29 वर्ष की आयु 36 करोड़ से ज्यादा है, लेकिन इनमें से करीब 8.7 करोड़ युवा न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न कोई नौकरी कर रहे हैं और न ही किसी प्रकार का ट्रेनिंग ले रहे हैं। ऐसे युवाओं को NEET श्रेणी में रखा गया है। इस रिपोर्ट में आयोग ने युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और स्थानीय मांग के अनुसार ट्रेनिंग कार्यक्रम चलाने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया है। नीति आयोग ने स्पष्ट किया है कि ये अनुमान वर्ष 2021 में आयोजित NSS (राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण ) के आंकड़ों पर आधारित हैं।

 

कौशल विकास योजनाओं का अधिकतम प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए नीति आयोग ने भारत के कार्यबल और शिक्षार्थियों को 5 श्रेणियों में विभाजित किया है। स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, औपचारिक और अनौपचारिक कार्य, NEET श्रेणी के युवा, महिलाएं और कमाई के साथ पढ़ाई करने वाले लोग। रिपोर्ट में कहा गया है कि NEET श्रेणी के युवा आय की कमी और पिछली शिक्षा पर हुए खर्च के वित्तीय बोझ से दबे होते हैं। ऐसे में छात्र अपनी मौजूदा वित्तीय स्थिति के बीच भारी शुल्क वाले स्किल ट्रेनिंग कोर्स का खर्च नहीं उठा सकते। नीति आयोग के अनुसार कमजोर वित्तीय स्थिति वाले NEET युवाओं और महिलाओं को किफायती या सब्सिडी वाली ट्रेनिंग के साथ-साथ वित्तीय सहायता की आवश्यकता है। रिपोर्ट में इस बात जोर दिया गया है कि सभी श्रेणियों के लिए सीखने के साथ कमाने का अवसर देना सबसे महत्वपूर्ण जरूरत है।

डिग्री के बाद भी रोजगार का संकट:

रिपोर्ट में इस बात पर चिंता व्यक्त की गई है कि भारत में केवल 8.25% स्नातक ही अपनी शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप नौकरी कर रहे हैं। आयोग ने कहा है कि कम आय वाले परिवारों के छात्र पहले से ही कॉलेज फीस और ट्यूशन के खर्चों से परेशान रहते हैं। पारंपरिक डिग्री के साथ अलग से पैसे देकर स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग में निवेश करना उनके लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं होता है। इसकी वजह से कई ग्रैजुएट युवाओं को पढ़ाई के बाद परिवार को आर्थिक सहारा देने के लिए कम वेतन वाली ही नौकरी क्यों नहीं मिलती है, वह उसे स्वीकार कर लेते हैं। यहां ऐसे युवाओं की संख्या भी काफी है, जो काम हासिल करने के लिए संघर्ष करते हैं और अंततः NEET श्रेणी में शामिल हो जाते हैं।

नीति आयोग ने कहा कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए देश के नागरिकों को निरंतर सीखने, कमाने और आगे बढ़ने के योग्य बनाना जरूर है। इसमें कौशल विकास की भूमिका प्रमुख है। रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2014-15 से अब तक 7.67 करोड़ से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।






Share on Facebook Share on WhatsApp

© 2026. All Rights Reserved.