Sunday Nov 8, 2026

उत्तराखंड के 5 अन्य बहादुर बच्चों को देहरादून में मिला बाल वीरता पुरस्कार

प्रथम मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार में 51 हजार रुपये के अलावा प्रशस्ति पत्र और पदक दिया गया

देवभूमि टुडे

चंपावत/देहरादून। चंपावत के घुरचुम गांव की माया कांडपाल सहित 6 बच्चों को प्रथम मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 6 नवंबर को देहरादून के परेड गाउंड में माया कांडपाल के अलावा चमोली की दिव्या, दीपिका एवं आरव सिंह, देहरादून की आराध्या और टिहरी गढ़वाल की श्वेता को कठिन परिस्थितियों में अदम्य साहस, वीरता एवं सूझबूझ से जिंदगी बचाने के लिए सम्मानित किया। प्रत्येक बच्चे के बैंक खाते में ₹51 हजार की राशि डीबीटी के जरिए उनके हस्तांतरित की गई। इसके अलावा उन्हें प्रशस्ति पत्र और पदक दिया गया।

चंपावत की बहादुर बालिका माया कांडपाल को देहरादून में सम्मानित करते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।

माया कांडपाल ने दो लड़कियों को नदी में बहने से बचाया था: भुवन चंद्र कांडपाल की बेटी माया कांडपाल ने 5 अगस्त 2025 को अपनी बहन कोमल और एक सहेली आरती को उफनाई नदी में बहने से बचाया था।

सम्मान पाने वालों में सबसे ज्यादा 3 बच्चे चमोली के: महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा 2026-27 के लिए पहले मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार के लिए राज्य स्तर पर प्राप्त आवेदनों में से 6 बच्चों का चयन किया था। इनमें चमोली के 3 तथा चंपावत, देहरादून एवं टिहरी गढ़वाल के एक-एक बच्चा शामिल है।

दिव्या, दीपिका एवं आरव ने भालू के हमले से बचाई कई छात्रो की जान: चमोली की दिव्या, दीपिका एवं आरव सिंह को भालू के हमले के दौरान साहस एवं सूझबूझ का परिचय देने के लिए सम्मानित किया गया। 22 दिसंबर 2025 को जीआईसी यूपीएस हरिशंकर, चमोली में सुबह 9:30 बजे एक भालू विद्यालय परिसर में घुस आया था। भालू ने छह के छात्र आरव सिंह पर हमला कर दिया। आरव ने स्वयं को बचाने के लिए संघर्ष किया, जबकि कक्षा आठ की छात्रा दिव्या ने भालू का पीछा कर आरव को बचाने का प्रयास किया। इस दौरान दिव्या ने आरव को सुरक्षित विद्यालय तक पहुंचाने में सहायता की। वहीं दीपिका ने तत्काल अन्य नौ दाब्रों को कक्षा 7 के कमरे में पहुंचाकर सुरक्षित किया।

आराध्या ने बादल फटने के दौरान  बचाई जान: देहरादून की आराध्या को 2 जून 2026 को बादल फटने की घटना के दौरान साहस एवं सतर्कता दिखाने के लिए सम्मानित किया गया। भारी बारिश के बीच अचानक मलबा और पानी आने से पूर्व ही आराध्या ने खतरे को भांपते हुए घर में मौजूद सभी 17 लोगों को तत्काल सतर्क किया। जिससे वे सुरक्षित स्थान पर पहुंच सके। इसके साथ ही उन्होंने तीन वर्षीय एक छोटी बच्ची को पानी के तेज बहाव से भी बचाया।

श्वेता ने बुजुर्ग को वाहन की टक्कर से बचाया: टिहरी गढ़वाल की श्वेता को एक बुजुर्ग व्यक्ति का जीवन बचाने के लिए सम्मानित किया गया। 30 जनवरी 2025 को एक बुजुर्ग व्यक्ति सड़क पर लाठी के सहारे चल रहे थे। इसी दौरान सामने से एक वाहन तेजी से आ रहा था। श्वेता ने तत्काल बुजुर्ग का हाथ पकड़कर उन्हें सड़क के किनारे सुरक्षित किया। उनकी तत्परता से बुजुर्ग व्यक्ति की जान बच गई।

 






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