10 दिनों में टनकपुर- पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर खराब हुई 5 बसें
टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बेड़ीनाग से टनकपुर जा रही रोडवेज बस के तिलौन में खराब होने से मुसाफिर परेशान
देवभूमि टुडे
चंपावत। रोडवेज बस एक बार फिर ब्रेकडाउन। इसी माह बस खराब होने की यह कोई पहली घटना नहीं है। तो क्या बस खराब होना अब कोई समस्या है भी? मुसाफिरों की फजीहत की निगम को कोई फ्रिक है भी? यात्रियों की सुरक्षित एवं सुगम यात्रा रोडवेज की प्राथमिकता में है भी क्या? अगर इन सवालों के जवाब हां में हैं, तो निगम क्या कर रहा है?
उत्तराखंड रोडवेज की टनकपुर डिपो की बेड़ीनाग से 189 किलोमीटर दूर टनकपुर आ रही एक बस 10 अक्टूबर को टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर लोहाघाट व चंपावत के बीच तिलोन में खराब हो गई। बस की दगा देने से 25 यात्रियों को काफी देर तक फजीहत झेलनी पड़ी। लंबा इंतजार करना पड़ा। खराब हुई बस 8 साल पुरानी है और करीब 10 लाख किलोमीटर चल चुकी है। बाद में इन मुसाफिरों को अलग-अलग वाहनों से आगे जाने को मजबूर हुए।
क्या कहते हैं जिम्मेदार:
बेड़ीनाग से टनकपुर आ रही रोडवेज की बस अल्टरनेटर खराब होने से तिलौन के पास खराब हो गई। बाद में दूसरे वाहन से यात्रियों को आगे को रवाना किया गया।
सुरेश चंद्र पांडेय,
प्रभारी सहायक मंडलीय प्रबंधक
रोडवेज, टनकपुर।
पहले भी खराब हो चुकी बसें:
चंपावत। रोडवेज की बस के खराब होने का 10 अक्टूबर का मामला इकलौता नहीं है। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर इसी माह अब तक 5 बसें रास्तों में खराब हो चुकी है। 2 अक्टूबर को पोंटा साहिब जाने वाली बस खराब हुई। 4 अक्टूबर को धारचूला जाने वाली बस बीच रास्ते में बंद हो गई।
भव्य स्टेशनों से पहले चाहिए फिट बसें:
चंपावत जिले में इस वक्त करीब 300 करोड रुपए की लागत से रोडवेज के दो स्टेशन बनाए जा रहे हैं। टनकपुर में 237 करोड रुपए से अधिक की लागत से ISBT और चंपावत के रोडवेज स्टेशन में 62.33 करोड़ रुपये सिटी सेंटर निर्माणाधीन है। इससे रोडवेज के आधारभूत ढांचे को मजबूती मिलेगी, लेकिन इसके उल्ट रोडवेज यात्रियों की आवाजाही की मौजूदा स्थिति ठीक नहीं है। नागरिकों का कहना है कि बस स्टेशन बनें, लेकिन इससे ज्यादा जरूरी रोडवेज की अच्छी और सुविधाजनक बसों की उपलब्धता।
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