चंपावत के सत्र न्यायालय का फैसला
टनकपुर क्षेत्र में 21 मार्च 2024 को 16 साल की एक किशोरी को भगाने और दुष्कर्म का मामला
देवभूमि टुडे
चंपावत। किडनेपिंग एवं नाबालिग से दुष्कर्म करने के एक अभियुक्त को चंपावत के सत्र न्यायालय ने दोषी ठहराया है। चंपावत के सत्र न्यायाधीश जिला जज अनुज कुमार संगल ने 31 अक्टूबर को गुनाहगार को 10 वर्ष का साधारण कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड नहीं देने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। वहीं दूसरे अभियुक्त अरमान के खिलाफ विशेष सत्र परीक्षण की कार्यवाही उच्च न्यायालय द्वारा निरस्त कर दी गई है।
टनकपुर क्षेत्र से 21 मार्च 2024 को 16 साल की एक किशोरी को भगाने की घटना हुई थी। नाबालिग के परिजनों की तहरीर पर टनकपुर पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचना के बाद दो आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 65, 87, 137 (2) एवं POCSO अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था।
आरोपपत्र दाखिल होने के बाद अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हुई। गवाहों के बयान, साक्ष्य, दस्तावेज, तमाम जिरह को सुनने के बाद सत्र न्यायालय ने अभियुक्त हाशिम (20) को दोषी माना। सत्र न्यायाधीश चंपावत के जिला जज अनुज कुमार संगल ने गुनाहगार हाशिम को 3 धाराओं में 10 वर्ष का साधारण कारावास एवं कुल 55 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही अर्थदंड की जमा राशि में से 50 हजार रुपये बैंक खाते के माध्यम से पीड़िता को अदा करने एवं 1 लाख रुपये की प्रतिकर राशि पीड़िता को देने के राज्य सरकार को आदेश दिए। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता केएस राणा ने की।
किन धाराओं में क्या सजा मिली:
1.BNS की धारा 137 (2) के अंतर्गत 3 वर्ष का साधारण कारावास एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड। अर्थदंड अदा नहीं करने पर 1 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
2.BNS की धारा 87 के अंतर्गत 5 वर्ष का साधारण कारावास एवं 15 हजार रुपये अर्थदंड। अर्थदंड अदा नहीं करने पर 2 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
3.POCSO ऐक्ट की धारा 4 (1) के अंतर्गत 10 वर्ष का साधारण कारावास एवं 30 हजार रुपये अर्थदंड। अर्थदंड अदा नहीं करने पर 3 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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