9.58 करोड़ से संवरेगी 12 किमी रोड…भूमि पूजन हुआ

शहीद शिरोमणि चिल्कोटी चंपावत-गौड़ी-किमतोली मोटर मार्ग का सुधारीकरण होगा
सड़क से बढ़ेगी आर्थिक गतिविधियां और बेहतर होगा पर्यटन
देवभूमि टुडे
चंपावत। चंपावत में शहीद शिरोमणि चिल्कोटी चंपावत-गौड़ी-किमतोली मोटर मार्ग का सुधार होगा। आज 25 मार्च को सुधारीकरण कार्य का श्रीगणेश किया। विधायक प्रतिनिधि प्रकाश तिवारी और भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद सामंत ने मंत्राोचार के बीच भूमि पूजन कर कार्य का शुभारंभ किया। लोनिवि की ओर से 12.15 किमी लंबे मोटर मार्ग का 958.34 लाख रुपये से सुधारीकरण किया जाएगा। इससे लोहाघाट से चंपावत का फासला कम होने के साथ ही भक्टा, गौड़ी, बसान, चिल्कोट, किमतोली सहित आसपास के कई गांवों के चार हजार से अधिक लोगों को इस सड़क का सीधा लाभ होगा। इससे आर्थिक गतिविधियों के साथ पर्यटन को भी लाभ होगा।
सीएम कैंप कार्यालय के नोडल अधिकारी केदार सिंह बृजवाल ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र की आधारभूत संरचना को मजबूत करने में मददगार होगी। कार्यक्रम में छतार की सभासद प्रेमा चिल्कोटी, बाराकोट की क्षेत्र पंचायत प्रशासक विनीता फर्त्याल, रेखा देवी, चंपावत के पूर्व ब्लॉक प्रमुख बहादुर सिंह फर्त्याल, वरिष्ठ भाजपा नेता श्याम नारायण पांडेय, हरीश पांडेय, हरगोविंद बोहरा, व्यापार मंडल अध्यक्ष विकास साह, रोहित बिष्ट, पूर्व जिला पंचायत सदस्य मुकेश महराना, सूरज प्रहरी, सुनील पुनेठा, हरीश सक्टा, पूर्व जिला पंचायत सदस्य सरिता बोहरा, मनमोहन बोहरा, जगदीश अधिकारी, कैलाश अधिकारी, गोविंद प्रसाद, अंबादत्त फुलारा, प्रकाश पांडेय, आनंद सिंह, प्रकाश नेगी, पूरन सिंह, योगेश सिंह, गुमदेश विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष माधो सिंह अधिकारी, सरिता अधिकारी, किशोर चिलकोटी, कविता कठायत आदि मौजूद थे। इस मौके पर शहीद शिरोमणि चिल्कोटी के परिजनों ने राज्य सरकार का आभार जताया।
शिरोमणि चिल्कोटी ने भारत-पाक जंग में दी थी शहादत:
चंपावत। सेना के जांबाज सैनिक शिरोमणि चिल्कोटी ने 1965 में हुए भारत-पाक युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया था। 1965 में प्लाटूनों और ब्रिगेड हेडक्र्वाटर के बीच युद्ध के हालातों का आदान-प्रदान करने के लिए उनके अनुभव के आधार पर उन्हें संचार सेवा के लिए नियुक्त किया गया था। 7 सितंबर 1965 की शाम पाकिस्तानी सेना की ओर से बड़ी मात्रा में तोपखाने, मोर्टार और टैंकों से फायर शुरू कर दिया। संचार व्यवस्था बाधित हो जाने के बाद भी हालात की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने अपने अधीनस्थ प्लाटूनों को सचेत किया और लड़ाई के लिए तैयार करवाया। इसी बीच दुश्मन के तोपखाने का एक गोला उनके शरीर के ऊपर आ गिरा और शिरोमणि चिल्कोटी उसी स्थान पर मातृभूमि की रक्षा करते हुए शहीद हो गए।

शहीद शिरोमणि चिल्कोटी।(फाइल फोटो)
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